‘मुफ्तखोरी’ की चाहत पैदा कर सत्ता हासिल करने में जुटी पार्टियां

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शंकर सोनी.
अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी के शुरुआती संकल्प भ्रष्टाचार मुक्त भारत और जनलोकपाल थे। पार्टी के अंदर भी कुछ आदर्श बनाए गए जैसे पार्टी में एक व्यक्ति दो पद नहीं लेगा तथा एक व्यक्ति दूसरी बार पद नहीं लेगा, बेईमान को पार्टी में नहीं लेंगे, दूसरे दलों के नेताओं को नहीं लेंगे, लालबत्ती सुविधाएं नहीं लेंगे बस आम आदमी की तरह रहेंगे।
आदमी पार्टी का लक्ष्य राजनीति बदलना था। बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा को मुद्दा बनाकर आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता हासिल करने में कामयाब रहे। एक दशक के दौरान आम आदमी पार्टी राजनीति तो नहीं बदल पाई पर राजनीति ने आम आदमी पार्टी को बदल दिया। पार्टी के सारे आदर्श धरे रह गए। स्वार्थों की लड़ाई में प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास जैसे सभी लोगों को पार्टी से बाहर निकाला गया।
भ्रष्टाचार के मामलों में शीर्ष नेतृत्व को जेल की हवा खानी पड़ गई। अब इस चुनाव में सड़कों से स्वच्छता, वायु प्रदूषण, यमुना की सफाई आदि विकास के मुद्दे गौण हो गए अन्य पार्टियों की तरह मुफ़्त की सुविधाओं के नाम पर जनमत हासिल करने पर आ गए। इस चुनाव में केजरीवाल भी आम आदमी की जगह मिडिल क्लास के हितों पर जोर देते हुए कह रहे है उनकी पार्टी पुनः सत्ता में आती है, तो अगले पांच वर्षों में बेरोजगारी को दूर करने और युवाओं को रोजगार प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भाजपा गरीब महिलाओं, गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और पिछड़ी जातियों के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा कर रही है। भाजपा भी दिल्ली को विकसित एवं अत्यंत आधुनिक राजधानी बनाने की बात को जनता के समक्ष रख नहीं पा रही है।
कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी अभियान में मध्यम वर्ग के मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए विभिन्न वादे किए हैं। कांग्रेस जनता को शीला दीक्षित के समय के विकास पर जनता को गुहार लगा सकती थी पर अपनी अंदरुनी संगठन के चलते चुप पड़ी है। राहुल गांधी की खराब सेहत के कारण कुछ रैलियाँ रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे पार्टी के प्रचार अभियान पर असर पड़ा है।
सभी दलों के बीच मुफ्त सेवाओं और वित्तीय सहायता के वादों की होड़ लगी हुई है, जिससे दिल्ली के बजट पर अतिरिक्त भार पड़ने की संभावना है। सभी दल जिताऊ प्रत्याशियों को ढूंढने में लगे हैं। देश की राजधानी के चुनाव की महता को राजनीतिक दल समझ नहीं पा रहे हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस तीनों ही पार्टियां दिल्ली के मूलभूत मुद्दों से हटकर मुफ्त की सुविधाओं को चुनाव का आधार बनाए हुए है। चुनावी नतीजों से पहले सभी पार्टियों के लिए दिल्ली दूर दिखाई दे रही है।
-लेखक आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे हैं।

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