August 12, 2026

साहित्य

रंजना झा प्रेमरस संग बहे मलय समीर,चंचल चितवन करे मन अधीर। हरित अवनि, श्यामल अंबर,मुदित प्रकृति, पुलकित...
रजनी शर्माछत पर बैठी नन्ही गौरैया,इक दिन मुझसे यूं बोली,बदल गया है मानव अब तो,बदल गई दुनिया...
वेदव्यासजिस तरह बहता हुआ पानी और बोलता हुआ शब्द अपना रास्ता खुद बनाते हैं उसी तरह साहित्य...
हे मां दुर्गा! आओ धरती पर,वास करो हर नारी के अंदर। शैलपुत्री बन स्नेह बहाओ,जीवन-संगिनी शक्ति दिखाओ।...
रजनी शर्मा.मैं नवयुग की नारी हूंअपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती हूं,आसमान की ऊंचाइयों को छूना...