May 13, 2026

साहित्य

रजनी शर्माछत पर बैठी नन्ही गौरैया,इक दिन मुझसे यूं बोली,बदल गया है मानव अब तो,बदल गई दुनिया...
वेदव्यासजिस तरह बहता हुआ पानी और बोलता हुआ शब्द अपना रास्ता खुद बनाते हैं उसी तरह साहित्य...
हे मां दुर्गा! आओ धरती पर,वास करो हर नारी के अंदर। शैलपुत्री बन स्नेह बहाओ,जीवन-संगिनी शक्ति दिखाओ।...
रजनी शर्मा.मैं नवयुग की नारी हूंअपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती हूं,आसमान की ऊंचाइयों को छूना...
रजनी शर्मा. खेलो फाग, खेलो फाग,खेलो फाग साँवरे।छाया फागुन में अनुराग,खेलो फाग साँवरे। लाल, गुलाबी, नीले, पीले,भाँति-भाँति...