

ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले में नई सरसों की आवक जोरों पर है, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो रही हैं। पहली बार सरकार ने सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद 1 अप्रैल की बजाय 10 अप्रैल से शुरू करने का ऐलान किया है, जिससे किसानों में नाराजगी है। जानकारी के मुताबिक, 1 अप्रैल से किसानों का रजिस्ट्रेशन शुरू होगा, लेकिन सभी खरीद केंद्रों पर 15 अप्रैल के बाद ही खरीद प्रक्रिया तेजी पकड़ सकेगी। तब तक मंडियों में गेहूं की आवक भी बढ़ जाएगी, जिससे सरसों के भाव में और गिरावट की आशंका है। अब जब 10 अप्रैल से खरीद शुरू होगी और 15 अप्रैल के बाद ही प्रक्रिया में रफ्तार आएगी, तब तक सरसों की आवक चरम पर होगी। ऐसे में बाजार भाव में और गिरावट की पूरी संभावना है, जिससे किसान फिर से घाटे में जा सकते हैं।
फिलहाल मंडियों में सरसों का औसत भाव 5400 से 5500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि सरकार द्वारा घोषित एमएसपी 5950 रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों को डर है कि सरसों की आवक बढ़ने पर भाव में और गिरावट आ सकती है। ऐसे में उन्हें मजबूरी में फसल को कम दाम पर बेचना पड़ सकता है। हनुमानगढ़ जिले में इस बार 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई है। सिंचित क्षेत्र में इस बार 3 से 4 क्विंटल प्रति बीघा औसत उत्पादन संभावित है, जबकि बारानी क्षेत्र में पैदावार थोड़ी कम रह सकती है। किसानों को इस बार फसल से बेहतर आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन देरी से खरीद शुरू होने की वजह से अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। काबिलेगौर है, किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने सरकार से मार्च से ही खरीद शुरू करने की मांग की थी। किसानों ने समय से पहले खरीद शुरू करने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था ताकि उन्हें कम दाम पर फसल बेचने की नौबत न आए। बावजूद इसके, सरकार ने 1 अप्रैल की जगह 10 अप्रैल से खरीद शुरू करने का फैसला लिया।
जिले में 19 केंद्रों पर होगी सरकारी खरीद
सरसों की सरकारी खरीद के लिए 19 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से क्रय-विक्रय सहकारी समिति टाउन, जंक्शन, पीलीबंगा, गोलूवाला, टिब्बी, संगरिया, नोहर, रावतसर, पल्लू और भादरा में केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, ग्राम सेवा सहकारी समिति फेफाना, खुईयां, देईदास, परलीका, बड़बिराना, भैरूसरी, न्यौलखी, निनाण और डूंगराना में भी खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इससे किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर फसल बेचने में सुविधा मिलेगी।
पिछली बार हुआ था भारी नुकसान
पिछले साल भी समर्थन मूल्य 5650 रुपए प्रति क्विंटल था, लेकिन जब मंडियों में सरसों की आवक हुई, तो बाजार भाव गिरकर 4500 से 4600 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। 80ः से ज्यादा उपज किसानों ने औने-पौने दाम पर बेच दी। इस बार भी यदि स्थिति यही रही, तो किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
खरीद समय सीमा का निर्धारण सरकार का मामला
अब तक सहकारिता विभाग को खरीद का टारगेट नहीं मिला है। अधिकारी पुरानी गाइडलाइन के अनुसार ही खरीद की तैयारियों में जुटे हैं। प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा हर केंद्र पर किसानों की संख्या तय की जाती है और उसी के अनुसार राजफैड द्वारा सहकारिता विभाग के माध्यम से खरीद की जाती है। उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां अमीलाल सहारण ने बताया-सरसों की सरकारी खरीद की समय सीमा निर्धारित करना सरकार का मामला है। इस बार 10 अप्रैल से एमएसपी पर खरीद प्रारंभ की जाएगी और सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

