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हनुमानगढ़ में सामाजिक संवेदना और सामुदायिक सम्मान का एक सुंदर उदाहरण शनिवार को देखने को मिला, जब राजस्थान सामाजिक मंच ने वार्ड 26, 27 और 28 में सफाईकर्मियों को सम्मानित किया। समाज में अक्सर चर्चा बड़े मुद्दों की होती है, लेकिन ज़मीन पर खामोशी से काम करने वाले वे लोग, जो हमारी गलियों, सड़कों और मोहल्लों को स्वच्छ रखते हैं, उन्हें शायद ही कभी वह सम्मान मिल पाता है जिसके वे सचमुच हकदार हैं। इसी सोच को बदलने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने साफ कर दिया कि सामाजिक बदलाव केवल नीतियों से नहीं, बल्कि उन लोगों को पहचान देने से भी आता है जो निरन्तर समाज सुधार में जुटे रहते हैं।

कार्यक्रम में राजस्थान सामाजिक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह शेखावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सचिन कौशिक, डॉ. राजेंद्र सिंह बिदावत, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष भूपेंद्र बिशेन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सलाहकार मनोहरलाल चुघ आदि मौजूद थे। इन सभी ने मंच से एक ही संदेश दिया, समाज में सार्थक बदलाव का रास्ता उन सामाजिक प्रहरियों के सम्मान से होकर गुजरता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। विशेषकर कोरोना महामारी के दौर में सफाईकर्मियों ने जिस साहस और समर्पण का परिचय दिया, उसे याद करते हुए मंच के पदाधिकारियों ने उनकी जीवटता की खुलकर सराहना की।

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह शेखावत ने कहा कि कोरोना महामारी ने यह साबित किया कि सफाईकर्मी केवल नगरपालिका का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि समाज की पहली रक्षा पंक्ति हैं। उन्होंने कहा कि इन कर्मियों को सम्मानित करने का मकसद केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि समाज उनकी भूमिका को समझता है, सराहता है और स्वीकार करता है। सम्मान मिलने से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे और अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर पाएंगे।

प्रदेश उपाध्यक्ष सचिन कौशिक ने राजस्थान सामाजिक मंच के व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संगठन सामाजिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखता है। उनका मानना है कि शिक्षित समाज ही प्रगति की दिशा में स्थायी कदम बढ़ा सकता है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए मंच कई स्तरों पर सक्रिय है, ताकि आने वाली पीढ़ी अधिक जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सके। कौशिक के अनुसार, यदि समाज को बेहतर बनाना है तो उसकी जड़ें मजबूत करनी होंगी, और यह कार्य शिक्षा के बिना संभव नहीं।

कार्यक्रम के दौरान संगठन द्वारा चलाए जा रहे अन्य महत्वपूर्ण अभियानों पर भी चर्चा हुई। डॉ. शेखावत ने बताया कि ‘बेटी बचाओ, पानी बचाओ और वृक्ष लगाओ’ मंच के तीन प्रमुख अभियान हैं। उन्होंने कहा कि बेटी केवल परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि समाज की असली धुरी है। जब लड़की पढ़ेगी, आगे बढ़ेगी, तो वह अपने परिवार और समाज दोनों को मजबूत बनाएगी। इसी तरह उन्होंने पानी संरक्षण की गंभीर आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पीने योग्य पानी सीमित है और इसके दुरुपयोग से आने वाली पीढ़ियां संकट में पड़ सकती हैं। इसलिए पानी बचाने की संस्कृति को घर-घर तक पहुंचाना होगा।

पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि पेड़ केवल हरियाली नहीं, बल्कि पृथ्वी का जीवन-आधार हैं। राजस्थान सामाजिक मंच पौधरोपण को एक आंदोलन के रूप में चलाना चाहता है, ताकि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जा सके। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना आसान है, लेकिन उन्हें बचाना और बड़ा करना असली जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ मंच विभिन्न इलाकों में जागरूकता अभियान चला रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने भी सफाईकर्मियों को सम्मानित करने की इस पहल की सराहना की। उपस्थित जनों में विजय सोनी, राजेंद्र सिंह एडवोकेट, गोविंद सोनी, प्रवीण सिंह, जयप्रकाश बामनिया, संजय पारीक, डॉ. राजेंद्र खुंगर, राजीव दाधीच और परमजीत सिंह शामिल थे। सभी ने माना कि समाज तभी प्रगति करेगा जब हम उन लोगों के प्रति संवेदनशील होंगे जो दिन-रात समाज की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने में जुटे रहते हैं। सफाईकर्मियों को सम्मानित करने का यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग के प्रति आभार प्रकट करने का माध्यम है, जिसके बिना न कोई शहर साफ रह सकता है और न ही जीवन का सामान्य चलन सुचारू रह सकता है। राजस्थान सामाजिक मंच की यह पहल सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक बदलाव का संकेत देती है, जो आने वाले समय में समाज को और अधिक जिम्मेदार और मानवीय बना सकती है।

