June 27, 2026

gramsetu.sms@gmail.com

राजेश चड्ढ़ा ए हुसन हकीकी नूर अज़ल।तैनूं वाजब ते अमकान कहूं।तैनूं खालक ज़ात कदीम कहूं।तैनूं हादस ख़लक...
रजनी शर्मापिता..हमेशा साथ रहते है,हर कठिन समय में,सिर पर स्नेहिल हाथ रखकर,हौसलों के दीप जलाते हैं।पिता..अब नहीं...
रूंख भायलाराजी राखै रामजी ! आज बात एक चावै कवि री, कथाकार री।पैली बां री अेक कविता...
राजेश चड्ढ़ा​भाषा महज़ शब्दां दा समूह नहीं हुंदी, बल्कि एह किसे वी सभ्याचार, इतिहास, भूगोल ते माणसां...