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हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित कोहला की पहचान बनी बाबा सोमनाथ कुटिया आश्रम में इस वर्ष का दूसरा भंडारा बड़े श्रद्धाभाव और सामूहिक सहयोग के साथ सम्पन्न हुआ। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से आयोजित इस भंडारे में सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और सत्संग में शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। आश्रम के गुरुजी भक्त संत राजू नाथ जी की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को आस्था और सरलता का रंग दे दिया।

सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र मारवाल ने बताया कि भंडारा पूरी तरह गांव के सहयोग से आयोजित किया जाता है। ग्रामीण स्वयं आगे बढ़कर सेवाभाव से सामग्री, श्रम और समय देते हैं। उन्होंने कहा कि कोहला गांव में यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और हर बार पहले से अधिक उत्साह देखने को मिलता है। इस बार भी महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर भोजन वितरण से लेकर व्यवस्थाओं तक की सारी जिम्मेदारी निभाई।

कुटिया आश्रम को गांव की धार्मिक और सांप्रदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है। यहां किसी एक जाति या धर्म का वर्चस्व नहीं, बल्कि विविधता में एकता का वास्तविक रूप नजर आता है। आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, सिख और विभिन्न समुदायों के लोग समान आस्था से पहुंचे और शांत वातावरण में सत्संग का आनंद लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कुटिया केवल उपासना का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव की मजबूत डोर है, जहां हर इंसान खुले मन से आता है।

सत्संग के दौरान संत राजू नाथ जी ने मनुष्य जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जन्म सर्वश्रेष्ठ अवसर है और इसका सार तभी है जब इंसान दूसरों के लिए उपयोगी बने। उन्होंने जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिक धर्म बताते हुए कहा कि इंसानियत ही वह पुल है जो समाज को जोड़कर रखती है। उन्होंने सभी से प्रेम, सद्भाव और सेवा को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

भंडारे के समापन पर ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से आश्रम पर आने वाले भक्तों के लिए आगामी दिनों में कुछ विकास कार्यों की योजना भी बनाई। कोहला गांव में साल में दो बार लगने वाला यह भंडारा आज सामाजिक एकता, धार्मिक समरसता और ग्रामीण संगठन शक्ति का जीवंत उदाहरण बन चुका है। गांव की यह परंपरा आगे भी लोगों को जोड़ने का काम करती रहेगी।



