




ग्राम सेतु डेस्क.
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित वार्ड नं. 3 नई खुंजा में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 70वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा हुई। स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा और भावपूर्ण माहौल से भर दिया। शुरुआत में बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और उनके संघर्ष, विचारों और योगदान को नमन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीसीसी के महामंत्री मनोज बड़सीवाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल एक सामाजिक सुधारक या संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए आशा और अधिकारों की रोशनी थे। उन्होंने कहा, ‘बाबा साहब का जीवन हमें यह सिखाता है कि संघर्ष कितना ही कठिन क्यों न हो, शिक्षा और आत्मविश्वास के बल पर असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने दलित, पिछड़े और शोषित वर्गों को हक और सम्मान दिलवाने के लिए जो लड़ाई लड़ी, वह इतिहास का सबसे बड़ा सामाजिक अभियान है। आज हमारा दायित्व है कि उनके सपनों के भारत को वास्तविकता में बदलें।’

समाजसेवी देवीलाल वर्मा ने कहा कि अंबेडकर का संदेश वर्ग, जाति और धर्म से ऊपर उठकर मानवता की ओर ले जाता है। इंसान का असली धर्म न्याय, करुणा और भाईचारा है। यदि समाज अपने इतिहास, अपने महापुरुषों के संघर्षों से सीख लेता है, तभी वह मजबूत और सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ पाता है। बाबा साहब ने जो रास्ता दिखाया है, वही आधुनिक भारत की असली रीढ़ है।
कांग्रेस नेता रामनिवास किरोड़ीवाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने भारत को ऐसा संविधान दिया, जो दुनिया में सबसे समावेशी और संवेदनशील माना जाता है। विश्व मंच पर भारत के संविधान को जिस सम्मान से देखा जाता है, वह बाबा साहब की दूरदृष्टि और प्रतिभा का परिणाम है। उन्होंने हर उस व्यक्ति को आवाज दी, जो सदियों से वंचित था। आज हमें यह समझना होगा कि जातिगत भेदभाव, असमानता और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानित नहीं होगा, तब तक अंबेडकरवाद अधूरा है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यह भी जोर दिया कि अंबेडकर को केवल एक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि विचार और आंदोलन के रूप में समझना होगा। उनके द्वारा दिए गए शिक्षा, समानता और संवैधानिक अधिकारों के संदेश को व्यवहार में उतारना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इस अवसर पर द्वारका राम घोडेला, डॉ. अशोक कुमार, सतपाल दामडी, विकास भारतीय, राजेंद्र बड़सीवाल, मंगत बड़सीवाल, विक्रम सिंह तंवर, दलीप सिंह शेखावत, होकेश, गुगन राम, बिट्टू शर्मा और रविंदर सिंह सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं व नागरिकों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के अंत में तय किया गया कि वार्ड में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए नियमित जनभागीदारी अभियान चलाए जाएंगे, ताकि बाबा साहब का विचार हर घर और हर पीढ़ी तक पहुंच सके।

