



रूंख भायला.
राजी राखै रामजी! ‘हेत री हथाई’ में आज बात आपणी भासा री, आपणै सबदां री। बा तो सदांई करां, कीं नवी बात बतावो नीं! नवी बात आ है कै रूस दुनिया री दूजी महाशक्ति गिणीजै, दो दिन पैलां बठै रा राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन भारत आयोड़ा हा। इचरज री बात आ कै आज आपणै देस में लोगां रै अंगरेजी री गूंग चढ रैयी है पण रूसी राष्ट्रपति तो परायै देस में आय’र ई आपणी भासा में बोल्या। दूजां नै समझावण सारू बै दुभासियो साथै लाया। आप सोचस्यो, बान्नै अंगरेजी आवती नीं होवैली पण आ बात कोनी। रूस रो कोई भी मुखिया जद कदी बारै जावै बो आपरी भासा नीं छोडै, बा पिछाण है बीं री। पण आपणै अठै…..। जावण देवो, के पड़्यो है !
रूंख भायलै रो तो कैवणो है- ‘‘भांत-भांत री भासा सीखो, देस-देस री बोलियां, बिसराई जे निज भासा तो ओळखाण बचसी कियां ?’’ आज री हथाई में आपां आपणी भासा, आपणै लोक रा बै सबद चेतै करां जिका आपरी पिछाण गमावता जा रैया है। तो पछै देर क्यूं करां, पाछा घिरो जड़ां खान्नी, ल्यो सीखो राजस्थानी !

कठै जावो नंई ओ, सिधसारू होवै, ऊंट कोनी, ओठारू होवै। दियो बुझै कोनी, बड्डो होवै, अर बैलगाडी कोनी, लढो होवै। गमेड़ी चीज ढूंढां कोनी, सोधां हां, आपां सांड कोनी, गोधा हा। हर यो नीं बोलां, आपां लीलो कैवां, आलो होवै, कद गीलो कैवां। प्याज कोनी कांदा होवै, जोड़ नंई, सांधा होवै। ज्यादा नंई, बोळो कैवां, सफेद कोनी, धोळो कैवां। चक्कू कोनी, छुरियो होवै, कोर कोनी, मुर्हियो होवै। सब्जी काटै कोनी, बंदारै है, साग बणावै कोनी, सुधारै है। मक्खण कोनी, चूंटियो होवै, खरोंच कोनी कैवां, झरूंटियो होवै। डैथ कोनी, सौ बरस पूगणो होवै, वसूली कोनी, चूकणो होवै। बिरखा रो पाणी पालर कहिजै, गूंग खिंडावणियां नै झालर कहिजै। तो पछै बजावो झालर, खड़ी करो कालर !

क्यूं है नीं बात ! जे धीजो राखो, तो कीं और आगै बधां-
चाचो नंई ओ, आपां काको कैवां, आपणी भासा में माऊथ नै बाको कैवां। ताऊ कोनी, बाबो सा कैवणो, बैर होवो भलंई, भायां में रैवणो। जूलरी कोनी, टूमटाकी होवै, मा री दिराणी, काकी होवै। ताई कोनी, आपां बड्डी कैवा, अर नोटां रै बंडल नै गड्डी कैवां। हलवो कोनी, आपणै सीरो होवै, जावण द्यो भाई नै, आपणै बीरो होवै। सिस्टर कोनी, आपां बाई कैवां, औरत कद बोलां, लुगाई कैवां। मिसेज कोनी, जोड़ायत होवै, अर पेरेंट्स कोनी, आपणै मायत होवै। मा नै माऊ कैवां, पिताजी नै बाबो, करणी मा रै आंगणै देखो धोळो काबो। हसबैंड कोनी, भरतार होवै, लीली छतरी आळो करतार होवै। जीजो कोनी, आपां बनोई कैवां, हलवाई नै, कंदोई कैवां। दोस्त कोनी, भायला होवै, आपरी गावणिया, बडायला होवै। तो करो बडाई, आपणी भासा है जगचायी !

आज तो बात रो स्वाद आयग्यो, नीं तो इयां ई गूंग में जीवै हा। कित्ता-कित्ता सबद माटी होवण लाग रैया है। कीं और आवण देवो नीं दिखाण !
कमी कठै, ल्यो अेक पांत और ल्यो-
नमक कोनी, लूण होवै, आटो बोलो भलंई पण चूण होवै। चीणी नंई ओ, आपां खांड कैवां, गठरी कोनी, आपां पांड कैवां। आपां इकट्ठा कोनी करां, भेळा करां, भाई बेल्यां रै पाण ई तो मेळा करां। बिरखा में छात टपकै कोनी, चोवै है, दही मथै कोनी, बिलोवै है। आपणै दीवार कोनी, भींत होवै, अर मुफत कोनी, सींत होवै। हवा कोनी, आपणै पून होवै, चुप्पी कोनी, मून होवै। विदाई कोनी बोलां, सीख कहिजै, जूं रै इंडां नै लीख कहिजै। जिम्यां पछै हाथ धोवणो चळू होवै, अर चिता री राख कोनी, सळू होवै। भायला, सूरज डूबै कोनी बिसूंजै, अर कदे कदे जी भोत अमूझै। मेहमान कोनी, बटाऊ होवै, टाबरां नै डरावणियो कीड़ो हाऊ होवै। कैंची कोनी, कतरणी होवै, छेड़खानी नंई, कुचरणी होवै। तो करो कुचरणी, खावो गदीड़, घणी पड़ै तो पम्पोळ बोकर या आपरी पीड….!

लेट कोनी, आपणै मोड़ो होवै, अर लंगडो कोनी कैवां, खोड़ो होवै। ऊंचो सुणनियै नै बोळो कैवां, शोर शराबो होवै तो रोळो कैवां। ठिंगणो कोनी, आपां मदरो बोलां, गद्दो कद बोलां, फतरणो का गिदरो बोलां। ब्लाइंड कोनी ओ, आपां सूरदास कैवां, प्रकाश कद बोलां, उजास कैवां। भोजन कोनी, आपणै जीमण होवै, बकरी रै दो, अर गा रै चार थण होवै। मोठां रै मुठड़ी लागै, बाजरी गै सिट्टा, भूंडी बात करणिया लोग होवै फिट्टा। गरम कोनी, आपां तातो कैवां, लाल रंग नै रातो कैवां। पत्थर कोनी, भाठो का दग्गड़ होवै, पीठ कद बोलां, कड़तू का मग्गर होवै। समधी नंई ओ, सग्गा परसंगी होवै, खेती रा औजार तंगळी, जेई अर चौसंगी होवै। चिणाई रो काम कमठाणो कहिजै, गुड़ इमली रो सरबत इमलाणो कहिजै। घुटना कोनी ओ, गोडा कैवां, भगवां लेवणियां नै मोडा कैवां। मोडो बणनो सोरो कोनी पण राजस्थानी सीखणो, घणो दोरो कोनी !
तो भायलां, कीं सीखो दिखाण !आज री हथाई रो सार ओ है, कै सबद जिका गम रैया है बान्नै बरताव में ल्या’र सरजीवण करो, आपरी भासा री पिछाण करो, घर में, परिवार में, भाई बेल्यां में बोलो अर बतळावो। पुतिन रै भासा प्रेम सूं सेठिया जी री अेक बात चेतै आई है-
थे मुरधर रा बाजस्यो, बसो कठैई जाय
सैनाणी कोनी छिपै बिरथा करो उपाय
बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो….।
-लेखक राजस्थानी और हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं


