




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथनॉल फैक्ट्री को लेकर स्थानीय जनता और किसानों का विरोध लगातार जारी है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से फैक्ट्री स्थापना के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार और प्रशासन द्वारा तैयारी की गति बढ़ने से स्थानीय रोष और गहरा हो गया है। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए क्षेत्रवासियों और किसान संगठनों ने 10 दिसंबर को जनसभा आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसके माध्यम से वे अपना विरोध औपचारिक रूप से दर्ज कराएंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।
कांग्रेस ने आंदोलन का खुला समर्थन किया है। जनसभा की तैयारियों की समीक्षा के लिए कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर और विधायक अभिमन्यु पूनिया मंगलवार को टिब्बी पहुंचे। दोनों नेताओं ने ग्रामीणों, आमजन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में जनसभा में शामिल होने का आह्वान किया। उनके साथ गुरलाल मान, सुभाष मक्कासर और रणवीर नायक भी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह जनसभा सिर्फ विरोध का कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्र की भावनाओं का सामूहिक स्वर होगा, जिसे नज़रअंदाज़ करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि लोकतंत्र जनता की इच्छा पर चलता है, लेकिन प्रदेश में भाजपा सरकार जनता की भावनाओं को महत्व नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं, प्रशासन को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं, फिर भी एथनॉल प्लांट की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार यह रवैया जनता के अधिकारों की अनदेखी है। मक्कासर ने कहा कि टिब्बी क्षेत्र के हजारों लोग फैक्ट्री से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। किसानों की आशंका है कि फैक्ट्री के संचालन से भूजल पर दबाव बढ़ेगा, हवा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और खेती पर विपरीत असर पड़ेगा। उनकी राय में सरकार इन चिंताओं पर गौर करने के बजाय ‘गद्दीदारों और पूंजीपतियों’ के हितों को प्राथमिकता दे रही है।
मक्कासर ने यह भी कहा कि क्षेत्र की जनता अपनी समस्या को लेकर साफ और मुखर है, लेकिन सत्ता पक्ष इसके बावजूद अपने निर्णय पर अड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता के जीवन, पर्यावरण और खेतिहर अर्थव्यवस्था से जुड़े इतने बड़े मुद्दे को नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस जनता के साथ खड़ी है और यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।
विधायक अभिमन्यु पूनिया ने भी फैक्ट्री के प्रभावों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि टिब्बी क्षेत्र पूरी तरह कृषि पर आधारित है और यहां की समृद्धि खेतों की उत्पादकता पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि एथनॉल फैक्ट्री स्थापित होती है तो पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है और किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है। पूनिया का कहना है कि भाजपा सरकार उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए ग्रामीणों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ कर रही है। उनके अनुसार जिस प्रकार से प्रशासन फैक्ट्री स्थापना की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, उसमें स्थानीय जनता की सहमति या असहमति का कोई महत्व नहीं दिया जा रहा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 10 दिसंबर को होने वाली जनसभा सिर्फ विरोध जताने का माध्यम नहीं होगी, बल्कि यह आंदोलन की आगे की दिशा भी तय करेगी। जनसभा में किसानों, युवाओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह जनसभा उनके आंदोलन को नई दिशा देगी और सरकार को यह संदेश देगी कि जनता अपने हितों को लेकर एकजुट है।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनता की भावनाओं और चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया तो विरोध और उग्र हो सकता है। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक फैक्ट्री का नहीं है, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण, स्वास्थ्य और कृषि भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे नज़रअंदाज़ करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भी मिलकर जनसभा को सफल और प्रभावी बनाने का संकल्प व्यक्त किया है। उनका कहना है कि वे इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेंगे और जनहित से जुड़े इस आंदोलन को हर स्तर पर आगे बढ़ाते रहेंगे।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान टिब्बी क्षेत्र में फैक्ट्री स्थापना को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ भी तेज हो गई हैं। वहीं, ग्रामीणों की चिंता और विरोध को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक तूल पकड़ सकता है।




