




जुगलकिशोर. ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी कस्बे के पास इथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में आयोजित महापंचायत ने आंदोलन को नई धार दे दी। भीड़ ऐसी थी कि मैदान छोटा पड़ता दिखा, गांवों से पैदल, ट्रैक्टरों और वाहनों से आए महिलाओं-पुरुषों की उपस्थिति ने आयोजनकों का हौसला आसमान पर पहुँचा दिया। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की ओर से की गई विशाल लंगर व्यवस्था भीड़ के आकार का ही संकेत देती रही। प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं रोककर हालात को नियंत्रित रखने की कोशिश की।

महापंचायत के ठीक दूसरे छोर पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। निर्माणाधीन इथेनॉल प्लांट को घेरे में लेकर बड़ी संख्या में जवान तैनात किए गए। माहौल गर्म है और टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन ग्रामीणों के तेवर साफ हैं, वे पीछे हटने को तैयार नहीं।
सभा में फैक्ट्री हटाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्र के प्रमुख नेता भीड़ को संबोधित करने पहुंचे। विधायक अभिमन्यु पूनिया, पूर्व विधायक बलवान पूनिया, कांग्रेस नेत्री शबनम गोदारा, किसान नेता मंगेज चौधरी, रवि जोसन और माकपा नेता रघुवीर वर्मा आदि ने एक सुर में कहा कि यह लड़ाई किसी एक समूह या एक किसान की नहीं, बल्कि पूरे इलाके की है। मंच से बार-बार यह संदेश गूँजा कि टिब्बी किसान, महिलाएं, व्यापारी और युवा सभी इस फैक्ट्री के विरोध में एकजुट हैं।
रवि जोसन ने इथेनॉल फैक्ट्री को ‘जहरीली परियोजना’ बताते हुए कहा कि यह इलाके की हवा, पानी और जमीन को प्रदूषित करेगी। उनका तर्क था कि सरकार और प्लांट संचालक इतने आश्वस्त हैं तो जनता की आशंकाओं का साफ-साफ जवाब क्यों नहीं दे रहे। उन्होंने कहा कि कोई भी विकास जनता की कीमत पर नहीं होना चाहिए। जब लोग खुद कह रहे हैं कि उन्हें यह परियोजना नहीं चाहिए, तो थोपने की ज़िद किसलिए?
वक्ताओं ने बार-बार कहाकि वे उद्योग-धंधे का विरोध नहीं कर रहे। इलाके में विकास चाहिए, रोजगार चाहिए, लेकिन ऐसे उद्योग नहीं जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाकर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बिगाड़ दें। नेताओं का आरोप था कि प्रशासन एक पूंजीपति की परियोजना को बचाने में जनता के हितों को नजरअंदाज कर रहा है।
सभा में कई वक्ताओं ने प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार कब तक पुलिस के दम पर यह प्लांट चलवाएगी? जनता की आवाज़ को कब तक दबाएगी? उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन दृढ़ रहेगा, फैक्ट्री किसी भी कीमत पर नहीं लगने दी जाएगी।
महापंचायत के मद्देनजर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। कस्बे में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, हर एंट्री पॉइंट पर निगरानी रखी गई और अफसरों-कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गईं। ग्रामीणों के तेवर देखते हुए प्रशासन के लिए यह दिन परीक्षा जैसा रहा। भीड़ शांत रही, अनुशासित रही, लेकिन संदेश बिल्कुल साफ छोड़ गई, इलाके के लोग इथेनॉल फैक्ट्री नहीं चाहते और किसी भी कीमत पर इसे स्वीकार नहीं करेंगे।



