




ग्राम सेतु ब्यूरो.
जब पुरस्कार और सम्मान अक्सर भव्य मंचों, चमक-दमक और शोरगुल के बीच सिमट जाते हैं, तब टांटिया यूनिवर्सिटी श्रीगंगानगर में आयोजित एक सादगीपूर्ण लेकिन अत्यंत गरिमामय समारोह ने अलग ही मिसाल पेश की। अखबार में प्रकाशित आलेख ‘यदि भूले व्यवहार और त्यौंहार तो गए काम से यार!’ को चयन बोर्ड ने 40 प्रविष्टियों में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया और इसके लिए लेखक राजेन्द्र सारस्वत को पॉजिटिव जर्नलिज्म अवार्ड से नवाजा।
इस सम्मान समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसका आयोजन टांटिया यूनिवर्सिटी के नशामुक्ति केंद्र में किया गया, जहां उपचार के लिए आए हुए युवा भी मौजूद थे। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोच-समझी पहल थी। उद्देश्य स्पष्ट था, यह संदेश देना कि यदि कोई व्यक्ति समाज के लिए सार्थक, सकारात्मक और सम्मानित कार्य करता है, तो समाज उसे खुले मंच पर सम्मान देता है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने नशे की सामाजिक, मानसिक और पारिवारिक बुराइयों पर विस्तार से चर्चा की। युवाओं से आग्रह किया गया कि वे नशे की कुटेव के जाल से बाहर निकलकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हों और स्वयं उदाहरण बनें। साथ ही उनसे यह भी अपील की गई कि वे अपने अनुभवों के आधार पर अन्य लोगों को भी नशे की लत से मुक्ति दिलाने के लिए प्रेरित करें। संदेश सीधा था, नशामुक्ति केवल इलाज नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है।
सम्मान स्वरूप वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र सारस्वत को साफा पहनाया गया, शॉल ओढ़ाई गई, 5100 रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई और एक स्मृति-चिह्न भेंट किया गया। यह पुरस्कार केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन विचारों का सम्मान था जो व्यवहार, संस्कार और त्योहारों की मूल आत्मा को जीवित रखने की बात करते हैं।
समारोह में भारतीय पुलिस सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी एवं सहायक पुलिस अधीक्षक विशाल जांगिड़ ने कहा कि नशा अपराध, पारिवारिक विघटन और सामाजिक असंतुलन की जड़ बनता जा रहा है। यदि युवा समय रहते सही दिशा चुन लें, तो वे न केवल अपना भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।
जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता नेमीचंद वर्मा ने कहा कि नशामुक्ति अभियान को समाज के हर वर्ग का सहयोग मिलना जरूरी है। उन्होंने इसे केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का प्रश्न बताया।
टांटिया यूनिवर्सिटी के नशामुक्ति केंद्र के प्रभारी मनोरोग विशेषज्ञ चिकित्सक अंकुश शर्मा ने नशे के मानसिक और शारीरिक दुष्परिणामों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को बताया कि नशे की लत से बाहर निकलना कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं।
इस अवसर पर लेखक राजेंद्र सारस्वत की धर्मपत्नी श्रीमती महेंद्र सारस्वत, प्रसिद्ध कत्थक नृत्य गुरु पन्नालाल कत्थक, किशोर न्यायालय बोर्ड के सदस्य विकास सारस्वत, नशामुक्ति केंद्र के असिस्टेंट प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजकुमार जैन, को-ऑर्डिनेटर डॉ. कृष्ण कुमार आशु तथा विशेष सारस्वत सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह का समापन एक सशक्त संदेश के साथ हुआ, यदि हम अपने व्यवहार, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों को भूल गए, तो केवल त्योहार मनाने से समाज नहीं बचेगा। ऐसे आयोजनों के माध्यम से यह विश्वास मजबूत हुआ कि सही विचार, सही मंच और सही समय पर समाज की दिशा बदलने की ताकत रखते हैं।











