




ग्राम सेतु ब्यूरो.
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के कुल सचिव एवं सीनियर आईएएस देवाराम सैनी संक्षिप्त प्रवास पर हनुमानगढ़ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने राजकीय कृषि महाविद्यालय का निरीक्षण किया, अधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी शिक्षा सत्र की तैयारियों की समीक्षा की और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को परखा। निरीक्षण के बाद उन्होंने ‘ग्राम सेतु डॉट कॉम’ से बातचीत में विश्वविद्यालय की योजनाओं, हनुमानगढ़ कृषि महाविद्यालय की प्रगति और किसानों से जुड़े अनुसंधान कार्यों पर विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश ……
हनुमानगढ़ राजकीय कृषि महाविद्यालय के नए भवन को लेकर क्या प्रगति है?
-हनुमानगढ़ में राजकीय कृषि महाविद्यालय का नया भवन पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। इस भवन के निर्माण पर लगभग 14.2 करोड़ रुपये की लागत आई है। हमारा लक्ष्य है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट कर दिया जाए। इससे विद्यार्थियों को बेहतर कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। भवन आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि आने वाले वर्षों में भी किसी तरह की कमी महसूस न हो।
आगामी सत्र में प्रवेश प्रक्रिया और कक्षाओं की समय-सीमा क्या रहेगी?
-इस वर्ष जेट परीक्षा 21 जून को आयोजित करवाने की तैयारी है। हमारी कोशिश है कि जुलाई माह तक काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी कर ली जाए और अगस्त से नियमित कक्षाएं शुरू कर दी जाएं। इस बार विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि काउंसलिंग या प्रवेश प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। विद्यार्थियों का समय कीमती होता है, इसलिए विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है कि शैक्षणिक कैलेंडर समय पर चले।
स्टाफ नियुक्ति और पीजी कक्षाओं को लेकर क्या योजना है?
-स्टाफ की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया चल रही है। आवश्यक पदों को भरने के लिए नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। हनुमानगढ़ कृषि महाविद्यालय से अब तक दो बैच पास आउट हो चुके हैं। इसे देखते हुए अब स्नातकोत्तर यानी पीजी स्तर की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी है। इससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और हनुमानगढ़ में ही उन्हें बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
छात्रों के लिए हॉस्टल और अन्य सुविधाओं की क्या व्यवस्था की गई है?
-कृषि कॉलेज टाउन में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल बनाए गए हैं। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह बहुत बड़ी सुविधा है। छात्रों के हॉस्टल में लगभग 50 सीटों की व्यवस्था की गई है, जबकि छात्राओं के हॉस्टल में सीटों की संख्या कुछ कम रखी गई है। इसके अलावा प्रयोगशालाएं भी पूरी तरह तैयार की गई हैं, ताकि प्रायोगिक शिक्षा मजबूत हो और विद्यार्थियों को खेत और लैब, दोनों का संतुलित अनुभव मिल सके।
किसानों के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर कौन से प्रमुख अनुसंधान कार्य चल रहे हैं?
-किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध करवाना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए निरंतर अनुसंधान चल रहा है। चना, जौ और सरसों के लगभग 200 क्विंटल बीज तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। यह बीज राजस्थान सीड्स कॉरपोरेशन के माध्यम से किसानों तक पहुंचाए जाएंगे, ताकि बीज उत्पादन बढ़ाया जा सके। इसके बाद जीएसएस के माध्यम से यह बीज सभी किसानों को उपलब्ध होंगे। हनुमानगढ़ कृषि प्रधान जिला है। यदि किसानों को उन्नत बीज उचित दरों पर मिलेंगे, तो उनकी उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि होगी।







