



ग्राम सेतु ब्यूरो.
रावी और व्यास नदियों के जल बंटवारे को लेकर दशकों से चले आ रहे विवाद अब एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचते नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में केंद्र सरकार द्वारा गठित रावी-व्यास जल ट्रिब्यूनल की टीम सोमवार को राजस्थान के दौरे पर रहेगी। ट्रिब्यूनल के चेयरमैन विनीत शरण, सदस्य सुमन श्याम और पी. नवीन राव सहित अन्य अधिकारी हनुमानगढ़ जिले के मसीतांवाली हैड का निरीक्षण करेंगे। टीम के करीब दोपहर 12 बजे मौके पर पहुंचने का कार्यक्रम तय है। इस दौरे को लेकर जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने पूरी तैयारियां तेज कर दी हैं। नहर प्रणाली, जल प्रवाह और वितरण व्यवस्था से जुड़ी जानकारी एकत्र करने के लिए विभागीय अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहेंगे।
ट्रिब्यूनल की यह टीम केवल मसीतांवाली हैड ही नहीं, बल्कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों के विभिन्न नहरी क्षेत्रों का भी दौरा करेगी। उद्देश्य यह है कि जमीनी स्तर पर यह समझा जा सके कि जल वितरण व्यवस्था किस तरह काम कर रही है और किसानों को वास्तविक रूप से कितना पानी मिल रहा है। उत्तर राजस्थान के ये दोनों जिले कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर टिके हुए हैं। ऐसे में नहरों में पानी की उपलब्धता और उसका न्यायसंगत बंटवारा यहां के किसानों के लिए जीवन-मरण का सवाल माना जाता है। लंबे समय से इन क्षेत्रों में पानी की कमी और हिस्सेदारी को लेकर असंतोष भी समय-समय पर सामने आता रहा है।
रावी और व्यास नदियों के जल बंटवारे को लेकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच विवाद कई दशकों पुराना है। इस विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 1986 में रावी-व्यास जल ट्रिब्यूनल का गठन किया था। इससे पहले वर्ष 1985 में हुए पंजाब समझौते में जल वितरण को लेकर एक रूपरेखा तय की गई थी, जिसमें राज्यों के बीच पानी के हिस्से और उपयोग से जुड़े प्रावधान शामिल थे। इसके बाद 1987 में ट्रिब्यूनल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी थी, जिसमें राज्यों की मांगों और जल हिस्सेदारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया गया था। हालांकि रिपोर्ट आने के बाद विभिन्न राज्यों ने इस पर आपत्तियां दर्ज कराईं, जिसके चलते मामला पूरी तरह सुलझ नहीं सका और समय-समय पर इसकी सुनवाई और समीक्षा जारी रही।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में ट्रिब्यूनल में नई नियुक्तियों के बाद यह संस्था फिर से सक्रिय हुई है। इसके बाद से ट्रिब्यूनल लगातार विभिन्न राज्यों का दौरा कर जल विवादों की वास्तविक स्थिति और कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रही है। राजस्थान दौरा इसी श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें नहरों की मौजूदा स्थिति, जल प्रवाह की वास्तविकता और वितरण प्रणाली की व्यावहारिक समस्याओं को समझने पर जोर दिया जा रहा है।
हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर क्षेत्र के किसान इस दौरे को बेहद अहम मान रहे हैं। उनका मानना है कि यदि जमीनी हकीकत को सही तरीके से दर्ज किया गया तो भविष्य में जल बंटवारे से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है। वहीं प्रशासन भी इस दौरे को संवेदनशील मानकर पूरी सतर्कता बरत रहा है। नहर तंत्र से जुड़े सभी रिकॉर्ड, जल प्रवाह डेटा और संरचनात्मक जानकारी ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।







