



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिला स्थापना दिवस इस बार केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि पूरे जिले के गौरव, संस्कृति और जनभागीदारी का उत्सव बनने जा रहा है। जिला प्रशासन ने 10 से 12 जुलाई तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रमों को ‘पंच गौरव भटनेर उत्सव-2026’ नाम दिया है। पहली बार जिला स्थापना दिवस पर बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित समाज के हर वर्ग को अपनी प्रतिभा दिखाने और उत्सव का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव की अगुवाई में प्रशासन इस आयोजन को यादगार बनाने की तैयारियों में जुटा है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। उत्सव की सबसे बड़ी खासियत यह रहेगी कि इसमें राजस्थान, पंजाब और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृतियों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। वहीं समापन समारोह में प्रसिद्ध पंजाबी सूफी गायक कंवर ग्रेवाल और हास्य अभिनेता ख्याली सहारण अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को विशेष बनाएंगे।
कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विविधता की रंगारंग प्रस्तुतियां होंगी। देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले कलाकार अपनी लोक परंपराओं और कलाओं के माध्यम से दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाएंगे। साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं और जनभागीदारी आधारित कार्यक्रमों के जरिए आम नागरिकों को भी उत्सव से जोड़ा जाएगा।
उत्सव की शुरुआत 10 जुलाई की शाम हनुमानगढ़ टाउन स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित ‘रंग-तरंग’ कार्यक्रम से होगी। इस दौरान सूरतगढ़ की मशक वादन एवं ढोल पार्टी अपनी पारंपरिक धुनों से माहौल को उत्साहपूर्ण बनाएगी। बीकानेर की प्रसिद्ध कच्छी घोड़ी नृत्य मंडली, बाड़मेर के लंगा-मांगणियार कलाकारों की डेजर्ट सिम्फनी, हरियाणा की फाग एवं घूमर, बीकानेर की भवाई और तराजू नृत्य, किशनगढ़ (अजमेर) का चरी नृत्य तथा उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला की पंजाबी भांगड़ा टीम अपनी शानदार प्रस्तुतियां देंगी। लोक संगीत और लोक नृत्यों की यह श्रृंखला दर्शकों को राजस्थान से लेकर पंजाब और हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराएगी।
उत्सव के दूसरे दिन 11 जुलाई को सेंट्रल पार्क में ‘लोक रंग’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें राजस्थानी वेशभूषा में सजे रोबिले ग्रुप की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रहेगी। गोगामेड़ी की बीन-भपंग-बांसुरी जुगलबंदी, सूफी एवं लंगा लोक गायन, हरियाणा का नूर लोक नृत्य, बीकानेर का चरखुला नृत्य, अलवर का भपंग लोक नृत्य, पंजाब का गिद्धा-भांगड़ा और जोधपुर की विश्वविख्यात कालबेलिया नृत्य मंडली दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगी। यह कार्यक्रम लोक कलाओं की विविधता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बनेगा, जहां अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं एक ही मंच पर दिखाई देंगी।
जिला स्थापना दिवस के मुख्य दिन 12 जुलाई को ऐतिहासिक भटनेर दुर्ग से सेंट्रल पार्क तक ‘रन फॉर हनुमानगढ़’ और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य जिले के गौरव, एकता और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देना है।
शोभायात्रा में मशक वादन, कच्छी घोड़ी नृत्य, राजस्थानी रोबिले ग्रुप, श्रीगंगानगर की हडिपा पंजाबी ढोल टीम और गोगामेड़ी की बीन-भपंग-बांसुरी जुगलबंदी विशेष आकर्षण रहेंगी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच यह यात्रा जिले की सांस्कृतिक पहचान का भव्य प्रदर्शन बनेगी।
तीन दिवसीय उत्सव का भव्य समापन 12 जुलाई की शाम हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में आयोजित ‘सुरमयी संध्या’ स्टार नाइट के साथ होगा। इस अवसर पर प्रसिद्ध पंजाबी सूफी गायक कंवर ग्रेवाल अपनी लोकप्रिय और आध्यात्मिक रंग से भरपूर प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। वहीं हास्य अभिनेता ख्याली सहारण अपने चुटीले अंदाज और ग्रामीण जीवन से जुड़े हास्य प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को भरपूर मनोरंजन प्रदान करेंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि हजारों लोगों की मौजूदगी में आयोजित यह स्टार नाइट जिला स्थापना दिवस के इतिहास की सबसे यादगार सांस्कृतिक संध्याओं में शामिल होगी।
जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रमों में शामिल होकर इस उत्सव को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हनुमानगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक गौरव और सामाजिक एकता का उत्सव है।
गौरतलब है कि तीन दिनों तक चलने वाला ‘पंच गौरव भटनेर उत्सव-2026’ हनुमानगढ़ को एक नई सांस्कृतिक पहचान देने के साथ-साथ जिलेवासियों को अपनी जड़ों, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का भी अवसर प्रदान करेगा। जिला स्थापना दिवस पर आयोजित यह महोत्सव निश्चित रूप से आने वाले वर्षों के लिए एक नई और प्रेरणादायी परंपरा की शुरुआत साबित हो सकता है।








