





ग्राम सेतु ब्यूरो.
श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय (एसकेडीयू), हनुमानगढ़ में स्थापित ‘एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र’ जो कि राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा वितपोषित है, किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय में आयोजित छठा सात दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर रविवार, 21 सितम्बर को संपन्न हुआ।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि रिटायर्ड आईजी गिरीश चावला ने कहा, ‘एसकेडीयू द्वारा आयोजित यह सात दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर व जागरूकता कार्यक्रम किसानों को नई दिशा प्रदान करेगा। इस पहल के लिए मैं विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त करता हूँ कि लगातार ऐसे शिविर यहां आयोजित किए जा रहे हैं। इस प्रशिक्षण से किसानों को मधुमक्खी पालन का व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा, जिससे वे कृषि के साथ-साथ अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। मुझे विश्वास है कि यह शिविर किसानों के जीवन में आर्थिक सशक्तिकरण का नया मार्ग प्रशस्त करेगा।’

रजिस्ट्रार डॉ. श्यामवीर सिंह ने कहा, ‘किसान अब केवल कृषि पर निर्भर न रहकर मधुमक्खी पालन जैसे वैकल्पिक व्यवसाय से अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकता है। यह आर्थिक संबल की दिशा में ठोस कदम है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड द्वारा स्वीकृत एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले के किसानों व मधुमक्खी पालकों के लिए वरदान साबित होगा।’

प्रोजेक्ट इंचार्ज डॉ. मंगला राम बाजिया व डॉ. अंकित ने बताया कि यह अब तक का छठा सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर है। इससे पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन की देखरेख में सफलतापूर्वक ऐसे प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।
इस बार श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले के पाँच किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जुड़े कुल 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षणार्थियों के लिए निःशुल्क आवास व भोजन की व्यवस्था की गई। रविवार को शिविर का समापन हुआ, जहां सभी 25 प्रशिक्षणार्थियों को सर्टिफिकेट एवं मधुमक्खी पालन में उपयोग होने वाली किट प्रदान की गई।

शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन शुरू करने की तकनीक, देखभाल, शहद उत्पादन के वैज्ञानिक तरीके और इससे होने वाले आर्थिक लाभ की जानकारी दी। इस तरह, श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय का यह एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले के किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। कृषि से इतर यह पहल किसानों को न केवल आर्थिक रूप से मज़बूत करेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।






