


राजेश चड्ढ़ा.
पिन्नी इक रवायती पँजाबी मिठाई या इक स्वादी पकवान है जो सदियाँ तों पँजाबी घराँ विच इक मुख भोजन रेहा है। अपणे भरपूर गिरीदार स्वाद अते सुगंधित मसालेयाँ लयी पछाणी जाण वाली एह मिठाई, खास कर के सर्दियाँ दे महीनेयाँ दौरान बहोत सारे लोकाँ दे दिलाँ विच इक खास जगह रखदी है। मनेया जाँदा है कि पिन्नी दी शुरुआत पँजाब तों होयी। पँजाब नूँ अपणी खेतीबाड़ी, डेयरी उत्पादाँ अते समृद्ध रसोई परँपरावाँ लयी जाणेया जाँदा है। पिन्नी नूँ कणक दे आटे, घ्यो, गुड़, कयी तरहाँ दी गिरियाँ अते सुक्के फलाँ नाल बणाया जाँदा है।

इतिहासिक तौर ते पँजाब दे लोक अपणी ज़मीन दी खेतीबाड़ी दी उपज ते बहोत ज़्यादा निर्भर करदे रहे हन, जिस विच कणक, गन्ना, बदाम, पिस्ता अते काजू वरगियाँ कयी तरहाँ दियाँ गिरियाँ शामिल हन। एह सामग्रियाँ न सिर्फ़ स्थानक तौर ते भरपूर तादाद विच मिलदियाँ हन सगों पँजाब दियाँ कठोर सर्दियाँ विच शरीर नूँ गर्म अते ऊर्जावान बणाये रखण लयी ज़रूरी ताकत वी प्रदान करदियाँ हन। अपणे पौष्टिक गुणाँ दी वजहों पिन्नी वरगियाँ मिठाइयाँ पँजाब दे घर-घर दी पसंदीदा बण गइयाँ हन अते पीढी़ दर पीढी़ चलदियाँ आ रहियाँ हन।

पँजाबी अपणे जीवंत त्योहाराँ अते भाईचारक जश्नाँ लयी जाणे जाँदे हन। पँजाब विच भोजन दी ढूँगी सभ्याचारक महत्ता है। खेतीबाड़ी, परौहणचारी अते भाईचारक साँझ वाले पँजाब दे समृद्ध इतिहास ने इक विलखण भोजन सभ्याचार नूँ जन्म दिता है जो वख-वख त्योहाराँ, जश्नाँ अते परिवारिक कट्ठाँ विच देखेया जा सकदा है। अपणे विलखण स्वाद दे नाल, पिन्नी वी इक भोजन पदार्थ तों वध बण गयी है। एह निघ, प्यार अते परंपरा दा प्रतीक है। पिन्नियाँ अक्सर सर्दियाँ दे मौसम दौरान खास कर के लोहड़ी दे त्योहार ते बणाई जाँदियाँ हन।

अपणे पौष्टिक ततवाँ नाल भरपूर पिन्नी, हर त्योहार दे दौरान इक मुख मिठाई है, जिसदा आनंद पूरा परिवार लैंदा है अते मेहमानाँ नूँ सदभावना दे प्रतीक वजहों पेश कीती जाँदी है। इस तों अलावा पँजाबी सभ्याचार विच पिन्नी नूँ मेहमान नवाज़ी दा प्रतीक वी मनेया जाँदा है। जदों किसे पँजाबी दे घर परौहणे औंदे हन ताँ, उन्हाँ नूँ पिन्नी भेंट करणा निघ अते सतकार दा प्रतीक मनेया जाँदा है। इस नूँ अक्सर आराम अते पोषण दोवाँ लयी गरम पीण वाले पदार्थां नाल परोसेया जाँदा है।

पिन्नी दा पँजाब दे नाल मजबूत सँबंध कई कारकाँ नाल जुड़ेया होया है। पँजाब दियाँ सर्दियाँ पिन्नी नूँ मौसमी पसंदीदा बनौण विच मुख भूमिका निभौंदियाँ हन। कणक अते गन्ने नाल अमीर खेतीबाड़ी स्रोताँ ने पिन्नी नूँ पँजाब विच आसानी नाल उपलब्ध करवाया है। इस दे अलावा पिन्नी विच मौजूद उच्ची ऊर्जा सामग्री इस नूँ सर्दियाँ दी ठँड दा मुकाबला करण लयी इक आदर्श भोजन बणौंदी है, जो कि पेंडू इलाकेयाँ विच खास तौर ते महत्वपूर्ण है। पिन्नी पँजाब दे हर परिवार दी अपणी विलखण व्यँजन हुँदी है। सारेयाँ पकवानाँ दा अक्सर परिवारिक इतिहास नाल ढूँगा भावनात्मक जुड़ाव हुँदा है, जिस नाल वड्ढे-बुज़ुर्ग अपणा ज्ञान नँवीं पीढ़ी नूँ दिंदे हन। इस परँपरा ने इस मिठाई नूँ ज़िंदा रखण अते पँजाब दे सभ्याचार विच ढुँगायी नाल शामिल करण विच मदद कीती है। पँजाब खेतीबाड़ी पखों समृद्ध इलाका है, इस लयी एत्थे भोजन अक्सर पोषण अते ऊर्जा प्रदान करण लयी बणाया जाँदा है।

पिन्नी वरगी मिठाई दा इक खास अते इतिहासक तथ, पहले विश्व युद्ध नाल वी जुड़ेया होया है। एह गल सब जाणदे हन कि पहला विश्व युद्ध 1914 विच शुरू होया अते 1918 तक चलेया। इतिहास दे सब तों घातक विश्वव्यापी संघर्षां विचों इक मन्ने जाण वाले इस युद्ध विच 30 तों वी वध देश शामिल सन। इक पासे, केंद्री ताकताँ, जिस विच मुख तौर ते जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी अते तुर्की शामिल सन अते दूजे पासे सहयोगी देश सन जिन्हाँ विच फ़्राँस, ग्रेट ब्रिटेन, रूस, इटली, जापान अते 1917 तों संयुक्त राज अमेरिका शामिल सन। उस वक्त भारत ते अंग्रेज़ाँ दा राज सी, इसलयी उन्हाँ ने जँग विच लड़ण लयी वड्ढी गिणती विच भारती सैनिक भेजे। केहा जाँदा है कि तकरीबन 15 लाख भारती सैनिकाँ नूँ पहले विश्व युद्ध विच लड़ण लयी भेजेया गया सी अते उन्हाँ नूँ पूरे यूरोप विच तैनात कीता गया सी। यूरोप विच तैनात सैनिक कयी महीनेयाँ तों जँग लड़ रहे सन अते उन्हाँ नूँ भारती भोजन दी याद आ रही सी। यूरोप विच तैनात सिख सैनिकाँ ने सरकार नूँ पिन्नियाँ उपलब्ध करवौण लयी खास बेनती कीती। कड़ाके दी ठँड अपणे सिखर ते सी अते भारती सैनिक, अपणे घराँ विच बणी पिन्नी दे विच थोड़ी निघ अते आराम दी तलाश विच सन। सैनिकाँ दे मनोबल नूँ वधौण लयी उन्हाँ दी बेनती स्वीकार कर लिती गयी अते पिन्नी दियाँ वड्ढियाँ खेपाँ भारत तो यूरोप भेजियाँ गइयाँ। इस तरहाँ पिन्नी दा पहले विश्व युद्ध नाल इक मिट्ठा अते विलखण सँबंध है।

अपणी समृद्ध सामग्री अते ढूँगी सभ्याचारक महत्ता वजहों पिन्नी पँजाब अते उस तों बाहर वी इक पसँदीदा मिठाई बणी होयी है।
अपनी इतिहासिक जड़ाँ तों लैके परिवारिक जश्नाँ अते त्योहाराँ विच अपणी भूमिका तक, पिन्नी पँजाबी मेहमान नवाज़ी अते गर्मजोशी दा प्रतीक बण गयी है। भाँवे तुसी कड़ाके दी ठंड विच पिन्नी दा स्वाद लै रहे हो या अपणे अज़ीज़ाँ नूँ तोहफ़े दे तौर विच दे रहे हो, पिन्नी सिर्फ़ इक मिठाई नहीं उस तों वध है। पिन्नी पंजाब दी अमीर विरासत दा इक हिस्सा है। इसलयी अगली वार जदों तुसीं मिठास दी राणी पिन्नी दा आनँद माणोगे, ताँ याद रखणा कि तुसी सदियाँ पुराणी पँजाबी परँपरा दा आनँद माण रहे हो।
-लेखक जाने-माने शायर और आकाशवाणी के पूर्व वरिष्ठ उद्घोषक हैं




