


ग्राम सेतु ब्यूरो.
टिब्बी तहसील के समीप प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर किसानों का विरोध अब जिले की सीमाओं से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। दिल्ली में इंडिया महागठबंधन के राजस्थान के सांसदों ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर टिब्बी क्षेत्र में एथेनॉल प्लांट नहीं लगाने की मांग को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में इस परियोजना से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय, कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पर गंभीर चिंता जताई गई है। प्रतिनिधिमंडल में श्रीगंगानगर सांसद कुलदीप इंदौरा, सीकर सांसद अमराराम, बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल सहित अन्य सांसद शामिल रहे। सांसदों ने मंत्री को अवगत कराया कि हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर का टिब्बी क्षेत्र राजस्थान का अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र है, जिसे ‘राइस बेल्ट’ के नाम से जाना जाता है। यहां की खेती पूरी तरह भूजल पर निर्भर है और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाएं इस संतुलन को गंभीर रूप से बिगाड़ सकती हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि टिब्बी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाइयां प्रस्तावित हैं, जिनमें एशिया की सबसे बड़ी बताई जा रही एथेनॉल यूनिट, 40 मेगावाट का बिजली संयंत्र, प्रतिदिन 555 टन डीडीजीएस ड्रायर इकाई और 925 टन प्रतिदिन क्षमता का कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादन संयंत्र शामिल है। सांसदों ने बताया कि यह परियोजना उपजाऊ कृषि भूमि पर स्थापित की जा रही है, जिससे हजारों किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

ज्ञापन के अनुसार, उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रस्तावित संयंत्र प्रतिदिन करीब 60 लाख लीटर भूजल का दोहन करेगा। इसके अलावा 4400 किलोलीटर राख, 925 टन कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक तत्वों का प्रतिदिन उत्सर्जन होगा। सांसदों ने कहा कि प्रदूषण और संसाधनों के इस स्तर के दोहन से स्थानीय जल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सांसदों ने ज्ञापन में परियोजना की पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट को भी कठघरे में खड़ा किया। उनका आरोप है कि रिपोर्ट में गंभीर विसंगतियां हैं और परियोजना को गलत तरीके से बी-2 श्रेणी में रखा गया, जिससे अनिवार्य जनसुनवाई की प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया। जबकि यह परियोजना विद्यालयों, आवासीय क्षेत्रों और खेतों के बेहद नजदीक स्थित है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पास के एक अन्य एथेनॉल संयंत्र से होने वाले प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण पहले ही संज्ञान ले चुका है, जो इस पूरे क्षेत्र में पर्यावरणीय लापरवाही के एक पैटर्न की ओर इशारा करता है।

किसानों पर कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया
सांसदों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि किसानों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद राज्य प्रशासन ने दमनात्मक कार्रवाई की है। 10 दिसंबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों और मजदूरों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस घटना में संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित कई लोग घायल हुए। इसके बाद किसानों पर मुकदमे दर्ज कर अत्यधिक पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे जनाक्रोश और बढ़ गया है।
ज्ञापन में चार प्रमुख मांगों पर जोर
पहली, स्वतंत्र और पारदर्शी समीक्षा होने तक इस परियोजना को तत्काल निलंबित किया जाए। दूसरी, एक स्वतंत्र पैनल के माध्यम से नया और व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कराया जाए। तीसरी, आंदोलनरत किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। चौथी, यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी बड़ी औद्योगिक परियोजना को स्थानीय समुदाय की पूर्व सूचित सहमति और सभी पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के पालन के बिना आगे न बढ़ाया जाए।
उधर, 17 दिसंबर को हनुमानगढ़ में प्रस्तावित किसान महापंचायत को लेकर यह भी स्पष्ट हो गया है कि सांसद कुलदीप इंदौरा और अमराराम इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे। इंडिया महागठबंधन की ओर से लोकसभा में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस के चलते सांसदों के लिए व्हिप जारी किया गया है। सांसद कुलदीप इंदौरा ने बताया कि 17 से 19 दिसंबर तक लोकसभा में उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है, इसलिए वे महापंचायत में शामिल नहीं हो सकेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक पूरी मजबूती से उठाया जाएगा।



