


हे मां दुर्गा! आओ धरती पर,
वास करो हर नारी के अंदर।
शैलपुत्री बन स्नेह बहाओ,
जीवन-संगिनी शक्ति दिखाओ।
ब्रह्मचारिणी साधना धरो,
धैर्य-योग से पथ आलोकित करो।
चंद्रघंटा बन शीतलता लाओ,
शांति सुधा से जीवन महकाओ।
कुष्मांडा बन शत्रु संहारो,
साहस-ज्योति भीतर उतारो।
स्कंदमाता बन जीवन संगिनी,
कर दो सबका भाग्य दिव्यनि ।
कात्यायनी बन रूद्र रूप धरो,
भय हरकर सबको अभय करो।
कालरात्रि बन काल विधाता,
असुरों का कर दो संघारा ।
महागौरी बन जग कल्याण करो,
सिद्धिदात्री बन वरदान करो।
ममता रूप में मां रूप रहो,
सौम्य बहन -बेटी सी रहो।
काली बनो संकट काल में,
संहार करो पापी दल,पल में।
सरस्वती बन ज्ञान दो सबको,
बुद्धि -धृति का बल दो जन-जन को।
प्रेम रूप धर राधा बन जाओ,
हर कृष्ण हृदय में वास कर जाओ।
हे मां दुर्गे! नव रूप दिखाओ,
शक्ति, करुणा, प्रेम बरसाओ।
हे मां दुर्गे! आओ धरती पर,
वास करो हर नारी के अंदर।
रजनी शर्मा, व. अ. संस्कृत
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय समन्दनगर,
चक ज्वाला सिंह वाला, हनुमानगढ़, राजस्थान






