




ग्राम सेतु ब्यूरो.
नोहर में भाजपा नेता काशीराम गोदारा के निवास पर ऐसी भीड़ उमड़ी, जैसे किसी नेता के यहाँ नहीं बल्कि किसी पुराने ज़माने के चौपाल पर जन-मन की सीधी आवाज़ सुनने का मौका मिल गया हो। गोदारा ने अपने नोहर स्थित आवास पर जनसुनवाई रखी, और क्षेत्र की जनता, ख़ासकर किसान अपनी समस्याएँ लेकर बड़ी संख्या में पहुँचे। माहौल बिल्कुल देहाती लोकतंत्र वाला था; लोग सीधे बोल रहे थे, नेता सीधे सुन रहा था।
किसानों की मुख्य पीड़ा वही पुरानी, लेकिन हर फसल के साथ नई होकर लौटने वाली, नहरों में सिल्ट भरने से पानी की कमी, मोघों (नहर के जलद्वार) की खराब स्थिति, और हरियाणा से मिलने वाले पानी की उपलब्धता। यह इलाका पानी पर निर्भर है; यहाँ नहरें सिर्फ सिंचाई का साधन नहीं, जीवनरेखा हैं। इसलिए किसानों ने साफ़ कह दिया कि नहरों की पूरी सिल्ट सफाई करवाई जाए, मोघे दुरुस्त किए जाएँ, और हरियाणा से मिलने वाला पानी पूरा-पूरा मिले ताकि माइनर और छोटे चौनलों के अंतिम छोर तक पानी पहुँच सके। अंतिम छोर का किसान अक्सर सबसे ज़्यादा घायल होता है, क्योंकि पानी ऊपर ही अटक जाता है, नीचे तक पहुँचते-पहुँचते उसका अस्तित्व ही सूख जाता है।
काशीराम गोदारा ने शिकायतें सुनकर तुरंत संबंधित विभागों के अधिकारियों से बात की और मौके पर ही कई समस्याओं का समाधान करवाया। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ विभागीय स्तर पर दिक्कतें आएँगी, वहाँ मामला जयपुर तक ले जाकर सरकार से निर्देशित करवाया जाएगा। यह बात किसानों में भरोसा जगाने वाली थी, कम से कम उनकी बात किसी ऐसे दरवाज़े तक जा रही है जहाँ से कुछ बदल सकता है। जनसुनवाई का असल मकसद भी यही होता है, जनता अपनी बात कहे, और नेता तुरंत कार्रवाई दिखाए, न कि फाइलों में उन्हें दफन कर दे।
जनसुनवाई में बिजली, पानी, सिंचाई से जुड़ी अनेक समस्याएँ रखी गईं। कई मुद्दों का मौके पर ही समाधान होता गयाकृकहीं लाइनमैन से संपर्क करवाया गया, कहीं सिंचाई विभाग को निर्देश दिए गए, कहीं अवैध कटिंग या पानी रोकने की शिकायत दर्ज करवाई गई। किसानों ने भी इस सक्रियता को महसूस किया और गोदारा का धन्यवाद किया।
सबसे दिलचस्प बात रही भीड़ का विस्तार। फेफाना, चारणवासी, मलवाणी, रामसरा, ढाणी आराईयान, मुंसरी, ननाऊ, मेघाना, परलीका, बरवाली, निठाना, रामगढ़, उजलवास, बड़बीराना, सोती समेत लगभग दो दर्जन गाँवों के किसान यहाँ पहुँचे। यह संख्या सिर्फ भीड़ नहीं बताती, यह उस भरोसे का संकेत देती है कि लोग अपनी समस्याएँ सीधे नेता के दरवाज़े पर रखकर समाधान की उम्मीद करते हैं।
नोहर का ग्रामीण क्षेत्र हमेशा से अपनी नहर संस्कृति और कृषि पर टिके जीवन के लिए जाना जाता है। ऐसे में जब पानी की दिक्कत बढ़ती है, तो खेत ही नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था डगमगाती है। गोदारा की यह जनसुनवाई किसानों के लिए राहत का छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम लगी। भीड़ बताती है कि जनता अपनी उम्मीदें अभी भी नेता से जोड़कर रखती है, बस शर्त यही कि नेता भी उनकी आवाज़ सुनने को तैयार हो।



