



ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान सरकार की ओर से 19 मार्च से 15 मई तक संचालित मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान की शुरुआत के साथ ही पंचायती राज विभाग में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। 20 मार्च को प्रस्तावित विशेष ग्राम सभा के आयोजन को लेकर राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ द्वारा बहिष्कार के निर्णय के बाद स्थिति और जटिल हो गई। ग्राम विकास अधिकारियों की अनुपस्थिति में ग्राम सभाओं के आयोजन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों में पदस्थापित कनिष्ठ सहायकों पर डाली जाने लगी। इसी के विरोध में पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन राजस्थान के प्रदेश नेतृत्व ने अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं शासन सचिव व आयुक्त, पंचायती राज विभाग को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक प्रावधानों के किसी अन्य संवर्ग के कार्य मंत्रालयिक कर्मचारियों से कराना न केवल अवैध है, बल्कि स्थापित प्रशासनिक परंपराओं के भी विरुद्ध है।
प्रदेश प्रवक्ता नीपेन शर्मा ने कहा कि विभाग में समानांतरण की व्यवस्था ने पंचायती राज संस्थाओं को कमजोर कर दिया है और कर्मचारियों के बीच वर्ग संघर्ष जैसी स्थिति बना दी है। एक ओर मंत्रालयिक संवर्ग के कैडर रिव्यू और पदोन्नतियां कथित जांच के नाम पर वर्षों से लंबित हैं, वहीं दूसरी ओर अवकाश के दिनों में भी अभियानों में अवैधानिक रूप से ड्यूटी लगाई जा रही है।
नीपेन शर्मा ने बताया कि 20 मार्च की विशेष ग्राम सभा का ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा बहिष्कार किए जाने के बावजूद पंचायत समितियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में कनिष्ठ सहायकों को बाध्य किया जा रहा है, जबकि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 में ग्राम सभा के आयोजन की ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान की राज्य स्तरीय गाइडलाइन में भी कनिष्ठ सहायकों की कोई भूमिका तय नहीं की गई है।
पंचायत समिति हनुमानगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष कन्हैयालाल ने कहा कि जिला और खंड स्तर पर अधिकारियों द्वारा मनमर्जी से कनिष्ठ सहायकों को समितियों में शामिल कर ग्राम विकास अधिकारियों का विकल्प बनाना गलत परंपरा है। यह न केवल कर्मचारी जगत के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि तकनीकी रूप से भी अव्यवहारिक है, क्योंकि ग्राम सभा का समस्त डेटा निर्णय ऐप पर अपलोड किया जाना है, जिसकी आईडी और पासवर्ड मंत्रालयिक संवर्ग के पास उपलब्ध नहीं हैं।
संगठन ने साफ शब्दों में निर्णय लिया है कि अधिनियम और नियमों के विपरीत जाकर किसी अन्य संवर्ग के पदीय दायित्व मंत्रालयिक कर्मचारी नहीं निभाएंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान नीपेन शर्मा, कन्हैयालाल, राजदीप सिंह, सुन्दरदास स्वामी, दीपिका अरोड़ा, अजीत झोरड और काशीराम चावरियां उपस्थित रहे। कुल मिलाकर, ‘विकास’ अभियान की राह में विभागीय खींचतान आ खड़ी हुई है और सच कहें तो जब नियम किताबों में बंद रह जाएं, तो फाइलें ही शोर मचाती हैं।





