


ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जंक्शन में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भटनेर किंग्स क्लब ने सेवा और संवेदना की मिसाल कायम करते हुए जरूरतमंदों के बीच 500 कंबल वितरित किए। कड़ाके की ठंड से जूझ रहे गरीब, असहाय और बेसहारा लोगों के लिए यह पहल किसी संजीवनी से कम नहीं रही। शिव मंदिर सिनेमा के पास झुग्गियों से शुरू हुआ यह सेवा अभियान रात 12.30 बजे तक रेलवे स्टेशन परिसर, बाजार, सुरेशिया, खुंजा सहित विभिन्न क्षेत्रों में चलता रहा।
कंबल वितरण कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण विजय ने की। उन्होंने भटनेर किंग्स क्लब के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि जरूरतमंदों की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। यह केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि भटनेर किंग्स क्लब शुरू से ही मानव सेवा सर्वाेपरि के सिद्धांत पर काम करता आ रहा है, इसलिए यह संगठन भीड़ से अलग और समाज में अलग पहचान रखता है।
क्लब के अध्यक्ष कुलभूषण जिंदल ने बताया कि इस बार ठंड का असर जनजीवन पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसलिए मकर संक्रांति जैसे पुण्य अवसर पर क्लब ने कंबल वितरण का निर्णय लिया। उनका कहना था कि सेवा कार्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आगे भी भटनेर किंग्स क्लब इसी तरह जरूरतमंदों के लिए काम करता रहेगा।
कार्यक्रम प्रभारी सतनाम सिंह खोसा ने बताया कि लोहड़ी और मकर संक्रांति दोनों पर्व दान-पुण्य के लिए प्रसिद्ध हैं। भारतीय परंपरा में इन त्योहारों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि ठंड में कोई न ठिठुरे, कोई मजबूर न हो, इसी भावना से इस प्रकल्प को चुना गया। केवल कंबल ही नहीं, बल्कि खाद्य सामग्री का भी वितरण किया गया, ताकि जरूरतमंदों को तत्काल राहत मिल सके।
भटनेर किंग्स क्लब यूथ विग के अध्यक्ष आशीष गौतम ने कहा कि जरूरतमंदों के चेहरे पर राहत देखकर जो संतोष मिलता है, वह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। युवा टीम पूरे उत्साह के साथ मैदान में उतरी और देर रात तक सेवा कार्य में जुटी रही। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे सामाजिक कार्यों में आगे आना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आए।
कंबल वितरण का यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर के लिए एक संदेश भी था कि त्योहार केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए खुशियां बांटने का अवसर हैं। क्लब के सदस्यों ने झुग्गियों में जाकर, फुटपाथ पर सो रहे लोगों तक पहुंचकर और स्टेशन परिसर में भटकते जरूरतमंदों को खोज-खोजकर कंबल बांटे। कहीं बुजुर्ग दंपती मिले, कहीं छोटे बच्चे, कहीं मजदूर परिवार, हर जगह एक ही दृश्य था, ठंड से राहत और दिल से निकली दुआएं।
इस सेवा अभियान में रवि दाधीच, गजेंद्र दाधीच, मनीष अरोड़ा, कपिल सहारण, हरि चारण, कपिल गोयल, गुरमंगत सिंह, लेखराज गिरधर, सतविंद्र सिंह, गौरव बेनीवाल, गणेश गिल्होत्रा, बॉबी खुराना, महक गर्ग, राकेश गिल्होत्रा, डॉ. पुनीत जैन, पार्थ बिश्नोई, संजय कौशिक, मधुसूदन शर्मा, और अंशदीप सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मिलकर टीम भावना के साथ यह अभियान सफल बनाया।
स्थानीय लोगों ने भी भटनेर किंग्स क्लब की इस पहल की सराहना की। कई राहगीर रुककर यह दृश्य देखते रहे और क्लब के प्रयासों को सराहा। कुछ लोगों ने कहा कि आज के समय में जब हर कोई अपने में व्यस्त है, तब इस तरह के सामाजिक कार्य समाज में उम्मीद जगाते हैं।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व नई शुरुआत, सकारात्मकता और दान का संदेश देता है। भटनेर किंग्स क्लब ने इस संदेश को जमीन पर उतारते हुए साबित कर दिया कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
कुल मिलाकर, भटनेर किंग्स क्लब का यह कंबल वितरण अभियान न केवल जरूरतमंदों के लिए राहत लेकर आया, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बना। ठंड की रातों में जब कई लोग ठिठुरते हैं, तब ऐसे हाथ आगे बढ़ें तो इंसानियत जिंदा नजर आती है। यही मकर संक्रांति का असली अर्थ भी है दृ अंधेरे से उजाले की ओर, ठंड से गर्माहट की ओर और स्वार्थ से सेवा की ओर।


