





ग्राम सेतु डेस्क
आसमान से बरसी आफ़त ने इस बार मेहनतकश किसानों की उम्मीदों पर सीधा वार किया। कहीं तैयार फसल ज़मीन पर बिछ गई, कहीं दाने ओलों की मार से छलनी हो गए। खेतों में पसरी तबाही उस सपने की थी जिसे किसान महीनों की मेहनत, उधार और उम्मीद के सहारे सींचता है। ऐसे कठिन समय में जब किसान की आँखों में सवाल और मन में चिंता साफ झलक रही थी, तब भाजपा नेता अमित चौधरी खुद खेतों में उतरकर किसानों के साथ खड़े नजर आए।
भाजपा नेता अमित चौधरी ने भोमपूरा और रणजीतपुरा के कृषि क्षेत्रों में पहुंचकर सीधे खेतों में जाकर फसल नुकसान का जायजा लिया। टूटे पौधे, गिरी बालियाँ और मिट्टी में दबे दाने देखकर उन्होंने किसानों की पीड़ा को न केवल देखा, बल्कि उसे गंभीरता से समझा।
अमित चौधरी ने किसानों से विस्तार से बातचीत की। किसानों ने उन्हें बताया कि कैसे एक ही रात में उनकी साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया। किसी ने कर्ज लेकर बीज डाला था, तो किसी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए फसल से उम्मीदें लगा रखी थीं। इन बातों को सुनकर अमित चौधरी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को बुलाया और स्पष्ट निर्देश दिए कि नुकसान का सर्वे तुरंत शुरू किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सर्वे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर प्रभावित किसान के खेत का सही आकलन हो और नुकसान की वास्तविक रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि मुआवजा समय पर और पूरा मिल सके। उन्होंने यह भी कहाकि प्रक्रिया सरल रखी जाए, जिससे किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर न हों।
भाजपा नेता ने किसानों को भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को निराश या हताश होने की आवश्यकता नहीं है। ओलावृष्टि और बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए वे प्रशासन और सरकार स्तर पर पूरी मजबूती से बात रखेंगे। उनका कहना था कि मुआवजा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि किसानों के जख्मों पर मरहम होना चाहिए।
किसानों ने भी अमित चौधरी के इस दौरे को सकारात्मक पहल बताया। उनका कहना था कि जब कोई जनप्रतिनिधि खेत में आकर नुकसान देखता है और बात सुनता है, तो दर्द कुछ हल्का होता है और भरोसा बनता है कि उनकी आवाज ऊपर तक पहुंचेगी।






