


ग्राम सेतु ब्यूरो.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हनुमानगढ़ धान मंडी में आयोजित मुख्यमंत्री की सभा में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए। मंच से नेताओं ने कहा कि आने वाले समय में संसद और विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और उन्हें अधिक अवसर मिलेंगे। लेकिन कार्यक्रम के दौरान एक ऐसी घटना भी सामने आई जिसने पूरे आयोजन की तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए। जहां मंच से महिलाओं को राजनीति में अधिक हिस्सेदारी देने की बात हो रही थी, वहीं सभा में आई कुछ महिलाओं से उनकी काली चुनरी उतरवा ली गई।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सुरेंद्र्र पाल सिंह टीटी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद देश और राज्य की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जब आगामी चुनाव होंगे तो राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों में से 66 सीटों पर महिलाओं को विधायक बनने का अवसर मिलेगा। इसी तरह देश की 543 लोकसभा सीटों में से लगभग 170 सीटों पर महिलाओं के सांसद बनने का मार्ग प्रशस्त होगा।
टीटी ने इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को बड़ा अधिकार दिया है। टीटी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सोच हमेशा से महिला सम्मान और सशक्तिकरण की रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथों में है। केंद्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राजस्थान में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी बजट पेश कर रही हैं, जो महिलाओं के लिए गर्व की बात है।
श्रीगंगानगर के विधायक जयदीप बिहानी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में नारी शक्ति की महिमा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब देश के नाम के साथ ‘मां’ शब्द जुड़ा हुआ है, तो इससे समझा जा सकता है कि भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान कितना ऊंचा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार महिला सशक्तिकरण को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उसे जमीन पर उतारने का काम कर रही है।
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ ने भी महिला आरक्षण, लखपति योजना सहित अन्य योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारें ही वास्तव में महिलाओं के हितों के लिए काम करती हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
कार्यक्रम की एक दिलचस्प झलक यह भी रही कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंच पर महिला सुरक्षाकर्मियों के घेरे में नजर आए। उनके दाएं-बाएं दो महिला सुरक्षाकर्मी तैनात थीं। आमतौर पर वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में मंच पर महिला सुरक्षाकर्मी कम ही दिखाई देती हैं, लेकिन महिला दिवस के अवसर पर यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान एक ऐसी घटना भी सामने आई जिसने महिला सम्मान को लेकर सवाल खड़े कर दिए। सभा में आई कई महिलाओं की काली रंग की चुनरी उतरवा ली गई। बताया गया कि सुरक्षा कारणों से काले रंग के कपड़ों को मंच के आसपास ले जाने की अनुमति नहीं थी। इस वजह से कई महिलाओं को अपनी चुनरी हटानी पड़ी।
इस घटना से कुछ महिलाएं असहज और शर्मिंदा महसूस करती नजर आईं। श्रीगंगानगर से आई एक महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर उसे पहले से पता होता कि इस तरह की स्थिति बनेगी तो वह कार्यक्रम में आती ही नहीं। महिला ने कहा, ‘ऐसी नौकरी किस काम की जिसमें इज्जत ही न हो।’ उसने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों से इस बारे में तर्क भी किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसकी बात नहीं सुनी।
घटना को लेकर आम लोगों में भी असंतोष दिखाई दिया। भाजपा से जुड़े एक पूर्व पदाधिकारी ने भी इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि चुनरी या ओढ़नी भारतीय संस्कृति में सम्मान का प्रतीक मानी जाती है और उसे उतरवाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि यह काम महिला पुलिसकर्मियों द्वारा किया गया। संभव है कि वे केवल आदेश का पालन कर रही हों, लेकिन इससे महिलाओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में एक ओर मंच से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें संसद-विधानसभा तक पहुंचाने की बातें हो रही थीं, वहीं दूसरी ओर सभा में आई महिलाओं की चुनरी उतरवाने की घटना चर्चा का विषय बन गई। यह विरोधाभास कार्यक्रम के बाद भी लोगों के बीच चर्चा में बना रहा।






