


धीरेंद्र कुमार झा ‘धीरू’
संस्कृत साहित्य मे गौतमक नाम अनेक विद्यासँ सम्बद्ध अछि। गौतम व्यक्ति केर नामक संग-संग गोत्रनाम सेहो अछि। वेद, पुराण, महाभारत आओर रामायण मे सेहो गौतमक चर्चा छन्हि। कतौ आचार्य ‘अक्षपाद‘ नामे न्यायसूत्रक रचयिता छथि त’ कतौ पद्मपुराण, स्कंदपुराण, गांधर्व तंत्र आओर विश्वनाथक न्यायवृति मे न्यायसूत्रक निर्माताक नामे महर्षि गौतम छथि।
प्रसिद्ध विद्वान व नाटककार ‘भास’क अनुसार न्यायशास्त्रक रचयिता मेधातिथि छथि। मुदा किछु विद्वान लोकनि गौतम आ मेधातिथि दुनू नाम एक्के व्यक्तिक लेल कहलन्हि अछि।

नैयायिक गौतमक सम्बंध मे अनेक विद्वान लोकनि अलग-अलग बात लिखलन्हि अछि। म.म. पं. हरप्रसाद शास्त्रीक कहब छन्हि जे महर्षि गौतम, महात्मा बुद्ध सँ पहिने भेल रहथि परंच ‘न्यायसूत्र’क रचना काल ईसाक दोसर शताब्दी अछि। म.म. डॉ. उमेश मिश्रक अनुसारेँ न्याय सूत्रक कार्य बुद्ध केर समयमे सम्पादित भेल। सतीशचंद्र विद्याभूषणक मतेँ गौतमक धर्मसूत्र आओर न्यायसूत्र क कर्ता एकहि नाम गौतमसँ रहल होयताह आओर ओ बुद्धक समकालीन अर्थात 6ठी शताब्दी ईसा पुर्वक भ’ सकैत छथि। ओना अंत में म.म. डॉ. उमेश मिश्र 6 वीं सदी ईसा पूर्व मानलन्हि आओर ई बात कहलन्हि जे अक्षपाद आ गौतम दूनु एक्के छथि।

ई कहल जाइत छैक जे महर्षि गौतम, जनक आ याज्ञवल्क्यक समयक छथि। स्कंद पूराणक अनुसार,
आसीद ब्रह्मपुरी नाम्न मिथिलायाम विराजित,
तस्यम लसति धर्मात्मा गौतम नाम तपसः।

एहि सँ ई स्पष्ट होइत अछि जे मिथिलाक ब्रह्मपुरी गाम मे महर्षि गौतम रहैत छलाह जे आई ब्रह्मपुर, गौतम आश्रमक नाम सँ प्रसिद्ध अछि। बिहार राज्यांतर्गत दरभंगा सँ 32 किमी उत्तर कमतौल रेलवे स्टेशन सँ 7 किमी दूरी पर अछि ई गाम। एतय पवित्र गौतम कुंड अछि आओर एही ठाम हुनक आश्रम छलन्हि। महर्षि गौतमक पत्नी अहिल्याक नाम पर एतय अहिल्यास्थान अछि जकरा लोक अहियारी गाम सँ सेहो जनैत अछि ।

रामायणक अनुसार माता सीताक पिता (सीरध्वज) जनकक दरबार मे हुनक पुत्र शतानंद राज पुरोहित छलाह। कहल जाइत छैक जे जखन भगवान राम एहि मार्ग सँ जनकपुर जाइत छलाह तखन हुनके द्वारा अहिल्याक शापोद्धार भेल छलन्हि आ ओ पाथर सँ पुनः स्त्री भय गेली।
रामायणमे ई बात वर्णित अछि….
गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।
चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर॥
‘न्याय दर्शन’ क लेखक महर्षि गौतमक सरोकार मिथिला सँ छलन्हि।
-लेखक मैथिली साहित्य केर सशक्त हस्ताक्षर थिकाह




