




ग्राम सेतु ब्यूरो.
भगवान परशुराम जयंती को केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि समाज की एकता, संस्कार और प्रेरणा का उत्सव बनाने के उद्देश्य से हनुमानगढ़ टाउन में ब्राह्मण समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। आदित्य हॉस्पीटल के पास हुई बैठक में प्रबुद्धजनों ने श्रद्धा और अनुशासन के साथ जयंती मनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रमों की रूपरेखा पर गंभीर चर्चा हुई, जिसमें शोभायात्रा, मेधावी युवाओं का सम्मान और सामूहिक भोज जैसे प्रस्ताव सामने आए। हालांकि, अंतिम निर्णय लेने के लिए 11 अप्रैल को शाम 4 बजे जंक्शन स्थित दुर्गा मंदिर धर्मशाला में पुनः बैठक बुलाने पर सहमति बनी, ताकि आयोजन को सर्वसम्मति और ठोस योजना के साथ अंतिम रूप दिया जा सके।
समाज के प्रबुद्ध जनों ने भगवान परशुराम के आदर्शों, त्याग, शौर्य और न्याय को आत्मसात करते हुए जयंती को गरिमामय ढंग से मनाने का संकल्प लिया। बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि जयंती के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाए, समाज के उन मेधावी युवाओं का सम्मान किया जाए जो विभिन्न राजकीय सेवाओं के लिए चयनित हुए हैं, साथ ही सम्मान समारोह और सामूहिक भोज का आयोजन भी किया जाए।
डॉ. एम.पी. शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम केवल शस्त्रधारी योद्धा नहीं, बल्कि शास्त्र और शील के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जयंती के आयोजन के माध्यम से समाज को यह संदेश देना जरूरी है कि शिक्षा, संस्कार और सेवा ही समाज की असली शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर देते हुए कहा कि मेधावी युवाओं का सम्मान नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा।
प्रदीप ऐरी ने कहा कि परशुराम जयंती समाज को जोड़ने का अवसर है। उन्होंने सुझाव दिया कि शोभायात्रा में अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखी जाए, ताकि समाज की सकारात्मक छवि प्रस्तुत हो। उन्होंने कहा कि आयोजन ऐसा हो, जिसमें हर वर्ग युवा, महिला और वरिष्ठजन सहभागी बन सकें।
कालूराम शर्मा ने कहा कि सामूहिक भोज केवल भोजन का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक होता है। उन्होंने आग्रह किया कि कार्यक्रमों में दिखावे से अधिक सादगी और सहभागिता पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की परंपराएं तभी जीवित रहती हैं, जब उन्हें संगठित और सामूहिक रूप से निभाया जाए।
सचिन कौशिक ने युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज के आयोजन तभी सफल होते हैं, जब युवा आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्होंने कहा कि परशुराम जयंती के कार्यक्रमों में युवाओं को नेतृत्व का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि वे समाज सेवा और संगठन की परंपरा से जुड़ सकें।
बैठक में पंडित गिरिराज शर्मा ने कहा कि भगवान परशुराम जयंती समाज की आस्था और पहचान का पर्व है, जिसे पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिक से अधिक समाजबंधुओं से सहभागिता का आह्वान किया।
बैठक में डॉ. एम.पी. शर्मा, प्रदीप ऐरी, कालूराम शर्मा, लेखराम जोशी, भवानीशंकर शर्मा, झम्मन लाल शर्मा, सूर्यप्रकाश जोशी, विकास भनोत, कुंदनलाल उपाध्याय, आशीष पारीक, कुंजबिहारी महर्षि, एडवोकेट विजय जोशी, महेंद्र शर्मा, सचिन कौशिक, पंडित जसवीर शर्मा, एडवोकेट सचिन कौशिक, नाथूराम शर्मा, पवन कुमार ओझा, पंडित गिरिराज शर्मा और राम कुमार शर्मा सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।
अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 11 अप्रैल की बैठक में सभी प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगाकर आयोजन को सुव्यवस्थित, गरिमामय और समाज की एकता का प्रतीक बनाया जाएगा। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि भगवान परशुराम जयंती को श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता के साथ मनाया जाएगा।






