February 2, 2026

हेत री हथाई

रूंख भायला.धिन-धिन अे धोरां री धरती, राजस्थानी मावड़ीवीर धीर विद्वान बणाया खुवा खीचड़ो राबड़ी-भरत व्यास राजी राखै...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी !हैं ओ…, थे ‘मळ’ उतार लिया के !!बै कियां उतरै ? म्हानै तो...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी! आपणै अठै अेक चावो गीत है, ‘काळियो कूद पड़्यो मेळै में….!’ म्हूं सोचूं,...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी ! ‘हेत री हथाई’ बाचणियै भायलां रा फोन अर सनेसा आबो करै। जी...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी! राजस्थानी रै जूनै साहित में सोरठो अेक चावी ठावी विधा है। इण बाबत...
रूंख भायला.राजी राखै रामजी ! आज बात राजस्थानी में अलायदै ढंग सूं रचणियै कवि भूंगर री! हैं….भूंगर……कुण...