



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ का सिगलीकर मोहल्ला सरकारी विद्यालय आज यानी 28 नवंबर को किसी त्योहार से कम नहीं लग रहा था। वजह भी खास, अपनी शादी की 30वीं सालगिरह पर समाजसेवी राजेश दादरी और उनकी पत्नी रेखा दादरी ने घरों की जगमगाहट छोड़ बच्चों की मुस्कान को अपना उत्सव बनाया। वर्षों से बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए समर्पित राजेश दादरी ने यह संदेश दिया कि सच्ची खुशियाँ शोर-शराबे में नहीं, उन मासूम चेहरों की चमक में छिपी होती हैं जिन्हें कोई अपना मान ले। उनकी इस संवेदनशील पहल ने न सिर्फ स्कूल को उत्सवी माहौल में बदल दिया, बल्कि समाज को यह याद भी दिलाया कि निजी खुशी का सबसे खूबसूरत रूप वही है जो किसी और के भविष्य को रोशन कर दे।

लायन जोन चेयरपर्सन महक गर्ग बताती हैं, ‘समाज में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपनी व्यक्तिगत खुशियों को समाज की मुस्कुराहट से जोड़ते हैं। इन्हीं में से एक नाम है, समाजसेवी राजेश दादरी जो वर्षों से बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके भविष्य को संवारने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। अपनी इसी संवेदनशील सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी 30वीं वैवाहिक वर्षगांठ को एक अनूठे और प्रेरणादायक तरीके से मनाया।’

दरअसल, राजेश दादरी ने अपनी धर्मपत्नी रेखा दादरी के साथ सिगलीकर मोहल्ला स्थित सरकारी विद्यालय में पहुंचकर बच्चों के साथ समय बिताया। विद्यालय में बच्चों की मासूम मुस्कान और उत्साह ने इस विशेष दिन को और भी अर्थपूर्ण बना दिया। लायन जैकी गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान राजेश दादरी ने सभी बेटियों के साथ केक काटकर बच्चों को केक व पेस्ट्री खिलाई।

लायन डॉ. वी. एस. तिवाड़ी, महक गर्ग, मनोज सरावगी, सपना सरावगी व विद्यालय की प्रधानाचार्य अनीता शर्मा और शिक्षिका सीमा भी मौजूद रहीं। डॉ वी एस तिवाड़ी ने इस पहल को समाजसेवा की एक शानदार मिसाल बताया। उन्होंने बताया कि राजेश दादरी का नाम आज उन लोगों में गिना जाता है जिनके दिल में बेटियों के प्रति विशेष लगाव और ज़िम्मेदारी है। वे जन सहयोग से 2000 से अधिक सरकारी स्कूल की बच्चियों को लगातार सहयोग प्रदान कर रहे हैं और उनके खातों में जन सहयोग से 18 वर्ष की आयु तक हर महीने ₹100 जमा करने की अपनी अनूठी और प्रभावशाली पहल के लिए जाने जाते हैं। उनका यह प्रयास कई परिवारों के लिए उम्मीद और सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है।

राजेश दादरी ने कहा, ‘हमारी खुशी तभी पूरी होती है जब इसे इन बच्चों के साथ बाँट सकें। इनकी मुस्कान ही हमारे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है।’ रेखा दादरी ने भी बच्चों को शिक्षा, अनुशासन और मेहनत के महत्व को प्रेरक शब्दों में समझाया। सपना सरावगी ने कहा कि निजी उत्सव को समाज की खुशी में बदलना एक अनुकरणीय कार्य है। प्रधानाचार्य अनीता शर्मा ने समाजसेवी दंपति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं और उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।


