




ग्राम सेतु ब्यूरो.
हाड़ कंपा देने वाली ठंड, घना कोहरा और सर्द हवाओं की चुभन, लेकिन इन सबके बावजूद किसानों के कदम नहीं डगमगाए। 7 जनवरी को संगरिया की धान मंडी में ऐसा जोश और आक्रोश उमड़ा कि ठंड खुद दुबकती नजर आई। राठीखेड़ा में प्रस्तावित ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री के विरोध में आयोजित महापंचायत में किसानों का गुस्सा, जज्बा और जिद, तीनों साफ झलक रहे थे। पीली पगड़ियों में सजे किसान, हाथों में संघर्ष समिति के झंडे और जुबान पर तीखे नारे, मौसम की परवाह किए बिना उमड़े किसान सरकार को साफ संदेश देने पहुंचे, किसानों की उपजाऊ जमीन पर फैक्ट्री नहीं लगने दी जाएगी, चाहे कीमत कुछ भी चुकानी पड़े।
महापंचायत से पहले किसानों ने नगर परिषद कार्यालय परिसर स्थित किसान स्मारक पर 7 जनवरी 1970 के शहीद किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘लाल सलाम’ और ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, शहीद किसानों का नाम रहेगा’ जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। मंच के पास शहीदों की स्मृति में अस्थायी स्मारक बनाया गया, जहां लगातार लोग श्रद्धांजलि देते रहे। यह सिर्फ एक सभा नहीं थी, बल्कि इतिहास, भावनाओं और संघर्ष की जिंदा तस्वीर थी।
किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां के नेतृत्व में हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा से पहुंचे किसानों ने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोला। मंच से एथेनॉल फैक्ट्री का एमओयू रद्द करने और आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग दोहराई गई। साथ ही 11 फरवरी को टिब्बी के तलवाड़ा गांव में फिर से महापंचायत करने का ऐलान कर आंदोलन को और धार देने का संकेत दिया गया।
महापंचायत को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। संगरिया कस्बे के चारों प्रमुख प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की सघन जांच की गई। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। एडीएम उम्मेदीलाल मीणा, एएसपी अरविंद बिश्नोई, एसडीएम जय कौशिक और तहसीलदार मोनिका बंसल सहित कई अधिकारी मौके पर डटे रहे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए संगरिया तहसील और 10 किलोमीटर के दायरे में 30 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और धारा 163 लागू कर दी गई।
उग्राहां ने मंच से तीखे तेवर दिखाते हुए कहाकि सरकार पर भरोसा मत करो, अपनी लड़ाई जारी रखो। उन्होंने नए बिजली नियमों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इसकी आड़ में सब्सिडी खत्म करने की साजिश हो रही है। कहा कि किसान के पास डीजल के पैसे नहीं हैं और कॉरपोरेट का कर्ज राइट ऑफ किया जा रहा है।
भादरा के पूर्व विधायक बलवान पूनिया ने दो टूक शब्दों में कहाकि राठीखेड़ा में फैक्ट्री नहीं लगने देंगे। सरकार कहीं और फैक्ट्री लगाए, लेकिन किसान की उपजाऊ जमीन पर उद्योग नहीं। उन्होंने साफ कहा कि जब तक एमओयू रद्द होने का लिखित पत्र नहीं मिलता, तब तक प्रशासन और सरकार पर भरोसा नहीं।
भाना सिंह सिद्धू ने फैक्ट्री से होने वाले प्रदूषण पर चिंता जताई और कहा कि इससे पानी पीने लायक नहीं रहेगा, हवा सांस लेने के काबिल नहीं बचेगी। महंगा सिंह सिद्धू ने प्रशासन पर आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर अपमानित करने का आरोप लगाया और कहा कि किसान डरने वाले नहीं हैं। मंगेज चौधरी ने चेतावनी दी कि किसान शांत रहा है, लेकिन सब्र का बांध टूटेगा। ओम जांगू ने 7 जनवरी 1970 के गोलीकांड और इंदिरा गांधी द्वारा भूमि नीलामी रुकवाने के प्रसंग को याद दिलाते हुए कहा कि यह इलाका इतिहास से लड़ना जानता है और जरूरत पड़ी तो फिर वही जज्बा दिखेगा। कुल मिलाकर, संगरिया की धान मंडी में उमड़ा यह जनसैलाब साफ संकेत है, यह सिर्फ ठंड का मौसम नहीं, आंदोलन की गर्मी भी पूरे शबाब पर है। सरकार के लिए यह चेतावनी भी है और चुनौती भी।



