



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिला प्रमुख के रूप में कविता मेघवाल का सफर पूरा हो चुका है। ग्रामीण इलाकों से सीधा संवाद, सरकारी योजनाओं को सही हाथों तक पहुंचाने की कोशिश और महिलाओं को ‘भागीदार’ मानने की सोच उनके कामकाज की पहचान रही। उपलब्धियों के साथ कुछ अधूरे सपनों की कसक भी है, तो भविष्य को लेकर अनुशासन और धैर्य का सधा हुआ स्वर भी। इन्हीं अनुभवों, उपलब्धियों और सियासी संभावनाओं पर ‘ग्राम सेतु’ ने निवर्तमान जिला प्रमुख कविता मेघवाल से बातचीत की। प्रस्तुत है संपादित अंश
जिला प्रमुख के रूप में आपका कार्यकाल कैसा रहा?
-बहुत अच्छा और संतोषजनक रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिला और जनता से सीधे जुड़कर उनकी जरूरतों को समझा। प्रशासनिक प्रक्रिया, योजनाओं का क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारियों को करीब से जानने का मौका मिला। इस पूरे सफर में सहयोग देने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता का मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। सीख बहुत मिली, अनुभव और समझ दोनों बढ़े।
अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि आप किसे मानती हैं?
-तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिलाओं, ग्रामीणों और कमजोर वर्गों के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की थीं। जिला प्रमुख के रूप में मेरी प्राथमिकता यह रही कि इन योजनाओं का लाभ सही और पात्र लोगों तक पहुंचे। कई बार योजनाएं बन तो जाती हैं, लेकिन ज़मीन तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती हैं। हमने कोशिश की कि ऐसा न हो। पारदर्शिता और समन्वय के साथ काम किया, ताकि लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंचे।
क्या कोई ऐसा काम है जो आप चाहकर भी पूरा नहीं कर सकीं?
-जी हां, इसका मलाल जरूर है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों के लिए शौचालयों का निर्माण मेरी प्राथमिकताओं में शामिल था। कुछ स्कूलों में यह काम कराया गया, लेकिन सभी जगह इसे पूरा नहीं कर पाना मेरे लिए एक अधूरा सपना ही रह गया। कार्यकाल की समयसीमा और प्रक्रियागत कारणों से यह संभव नहीं हो सका। यह ऐसा विषय है, जिसे लेकर मुझे हमेशा कसक रहेगी।
ग्रामीण महिलाओं को लेकर आपकी सोच क्या रही?
-महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि भागीदार मानना जरूरी है। पंचायत से लेकर जिला स्तर तक महिलाओं की भागीदारी बढ़े, यही मेरी कोशिश रही। स्वयं सहायता समूहों, स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।
राजनीति में आगे का सफर कैसे देखती हैं?
-देखिए, यह फैसला पार्टी नेतृत्व का होता है। मैंने अपने स्तर पर ईमानदारी से काम करने का प्रयास किया है। अगर मेरा काम पार्टी को उचित लगा, तो निश्चित रूप से आगे अवसर मिलेगा। इस विषय में मुझे कुछ कहना उचित नहीं लगता। राजनीति में धैर्य और अनुशासन सबसे जरूरी होता है।








