



ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान में जल संसाधनों के बेहतर और टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में जल संसाधन विभाग ने एक अहम और व्यावहारिक पहल की है। इसके तहत शनिवार, 7 फरवरी को प्रदेशभर में विभागीय अभियंता अपने-अपने क्षेत्रों में जल उपयोक्ता संगमों के प्रतिनिधियों और किसानों से सीधा संवाद करेंगे। यह संवाद कार्यक्रम सुबह 9 बजे से शुरू होगा, जिसमें मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ एवं क्षेत्रीय अभियंता शामिल रहेंगे। इस संवाद का उद्देश्य कागजों में नहीं, बल्कि खेत और नहर के किनारे खड़े किसान की वास्तविक समस्या को समझना है। कार्यक्रम में बांधों और नहरों की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध जल संसाधन, सिंचाई व्यवस्था की चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही, उन्नत सिंचाई प्रणालियों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर के प्रभावी उपयोग, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और कम जल खपत वाली उन्नत फसल किस्मों पर किसानों को जानकारी दी जाएगी।
संवाद केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें सिंचाई शुल्क और उत्पाद आधारित प्रणाली, कृषि उत्पादों के विपणन की सुविधाएं तथा महिला किसानों की प्रभावी भागीदारी जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। विभाग का मानना है कि जब तक किसान को फसल का सही मूल्य और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक जल प्रबंधन पूरी तरह सफल नहीं हो सकता।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इस पहल को विभाग और किसानों के बीच भरोसे की कड़ी मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन केवल विभागीय प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए किसानों और जल उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। इसी सोच के तहत जल उपयोक्ता संगमों को सशक्त किया जा रहा है और उन्हें निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है।
मंत्री रावत ने बताया कि इस संवाद के माध्यम से अभियंता सीधे किसानों और संगम प्रतिनिधियों से सुझाव लेंगे, ताकि जल प्रबंधन की नीतियों और क्रियान्वयन को और अधिक व्यावहारिक एवं मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि जल उपयोक्ता संगम किसानों और जल संसाधन विभाग के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं और इनके माध्यम से सिंचाई परियोजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस संवाद से आपसी समन्वय सुदृढ़ होगा और जल प्रबंधन से जुड़े निर्णयों में किसानों की भागीदारी बढ़ेगी। यह पहल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के किसान-हितैषी और सहभागिता आधारित शासन दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण है।
माना जा रहा है कि डिजिटल युग में यह संवाद कार्यक्रम केवल बैठक नहीं, बल्कि फील्ड से फीडबैक लेने का प्रयास है। यदि यह पहल जमीन पर उसी भावना से लागू होती है, तो जल प्रबंधन में यह एक अहम मोड़ साबित हो सकती है, जहां नीति, तकनीक और किसान एक ही मंच पर संवाद करते नजर आएंगे।


