

रूंख भायला.
राजी राखै रामजी! आज बात जैतल री! आपां लारली अेक हथाई में रातीजोगै री बात करी ही, उणी सूं जुड़ी है जैतल री बात, जिकी गीतां में गाइजै। रातीजोगै री तो महिमा ई न्यारी! गीतेरण लुगायां रै घूघरिया बंध जावै इण रै नांव सूं! बंधणा ई चाइजै, रातीजोगै में मंगळ गाइजै, मोद मनाइजै, मैंदी मांडिजै, काजळ पाड़ीजै, सूंठ मसरको बणाइजै, अधरातियो करीजै, गीतां रै मिस देई देवता, पितरां नै रिझाइजै अर गाइजै रातीजोगै रो चावो ठावो गीत ‘जैतल’! आनंद ई आनंद..।
कुण है आ जैतल ? अर क्यूं कहीज्यो है, ‘गुड़ बिना क्यां री चौथ, जैतल बिना क्यां रो रातीजोगो’ आज इण री पड़ताल करां। रातीजोगै में आधी रात रै पछै ओ गीत छेकड़ जावतां गाइजै। इण बिना रातीजोगो पूरो नीं होवै, आ जूनी कैबत है। आपणै देस में बेटो जलमै तो मंगळ मोद मनाइजै, थाळी बजाइजै पण धीव रै जलम्यां! मूंडा लटक जावै सगळां रा, बान्नै धीजो बधाइजै कै आंधी लारै मेह ई आवै। पण जैतल रो गीत इण परंपरागत मानता नै तोड़तो लखावै जठै बेटी रै जलमियां अणूतो हरख बापरै, लाड कोड होवै।

लोक में बात आ भी चलै, कै आ जैतल जालौर बा सागी राणी ही जिकी रो जिकर मलिक मोहम्मद ‘जायसी’ आपरी पोथी ‘पद्मावत’ में ई मांड्यो है। लोक गीतां में ‘जैतल’ नै मारवाड़, सेखावाटी अर केई दूजी ठौड़ न्यारै-न्यारै भांत सूं गाइजै। कठैई उण रो धणी राणो काछबो है तो कठैई सोढा काछबो। पण आपां आं चक्करां में क्यूं पड़ां, गीत रो रस लेवां। गीत में राजकंवरी जैतल रै जलम पर हरख कियां मनाइज्यो, कियां बधाई बांटीजी, देखो दिखाण-
जलमी तो बाई जैतल वार सुवार
चांदणी चउदस री जलमी धीवड़ी
बाज्या बाज्या बाई रे सोहन थाळ
सोन कटारी नाळो मोड़ियो
झुलायो बाई नै गंगाजळ नीर
रेसम पोतड़ियां बाई नै पळेटियो
भुवा बाईसा भर मोतीड़ां रो थाळ
नखतर पुछावण भुवा सांर्च या
करल्यो जोसीजी हळबळियो सिनान
जूनै जुगां रा खोलो टीपणा…।

जोसीजी घणा हरखीजै कै धीव जलमी है राजाजी रै घरां। बै आपणो टीपणो खोलै अर नखतर देख भोत राजी होवै। जोसीजी सीख देवै-
जियो राज, नाम रखाय देवो बाई रो जैतली
और बधै तिलमास जैतल तो बधसी नित जौ जिती
गीत में आगै जैतल रै बाळपणै री बातां गाइजै, बा कियां कियां बध रैयी है, गीत री रंगत देखो-
लाग्यो म्हारी बाई नै पैलो दूजो मास
थड़ी तो उळांघै आ बेटी बाप री जियो राज
लाग्यो म्हारी बाई नै तीजो चौथो मास
थड़ियां में खेलै आ बेटी बाप री
लाग्यो बाई नै छटो सातवों मास
आंगणियै में दौड़ै बाई जैतली जियो राज
लाग्या म्हारी बाई नै पूरोड़ा मास
साथ सहेल्यां में बाई रमबा जाइयो जियो राज
झूला झूलै रे बाई अे तो अेकला
साथ सहेल्यां तानो मारै जी
अजे ओ कंवारी जैतल क्यूं फिरै
थारै सायनी साजै सासरो जियो राज
दौड़ी-दौडी बाई जामी कन्नै आई
जामीजी सूं करै बाई बिणती
थे म्हारा जामी जी मोहे परणाय
म्हारै सायनी साजै सासरो जियो राज
झूठी अे बाई कूड़ ना बोल
थारै सायनी ओ बाई झूलै पालणै

जैतल री बात सुण परा उण रा जामी जोड़ रो वर सोधण जावै पण ‘बेटी जाई रे जगनाथ, वां रा हेठै आया हाथ’। वान्नै जोड़ रो वर नीं लाधै। बै उदासी में कैवै-
फिर आयो रजवण देस परदेस
थारी रे जोड़ी रो जुग में हीरो ना मिल्यो
इण पर जैतल पड़ूत्तर देवै, बाप बेटी री बंतळ रो गीतरस लेवो दिखाण-
जाइयो म्हारा जामी जी समदरियां रै पार
म्हारी जोड़ी रो सोढो काछबो
बै तो बाई म्हारी लूंठोडा लोग
मोटो तो मांगै दाइजो
थे म्हारा जामीजी मोटोड़ो झेलो
मोटो तो देइज्यो बाई नै दायजो जियो राज

छेवट जैतल रो सगपण राणा काछबै सागै हो जावै। अर सुभ लगन में उणरो ब्याव मंडै-
तोरणियो तारां कैरी छांव
गिगन भवंतो बाई रो मैंडलो
पढिया गुणिया विपर बुलाय,
हण हथळेवो बाई रो जोड़ियो
परणी पाती बैठी रै बाजोट
हंस हंस मांगै रजवण दायजो

केई जिग्यां इण गीत में गाइजै कै जैतल हर फेरै रै साथै आपरो दायजो मांगती जावै, केई जिग्यां गाइजै कै फेरां रै पछै जैतल आपरै बा सा सूं दायजै री मांग करै।
पैलो फेरो लियो राजकंवार
देइयो म्हारा जामी जी घोड़लियां री घूम
दूजो फेरो लियो राजकंवार
हस्ती तो देइयो बाई नै झूमता
तीजो फेरो लियो राजकंवार
देइयो म्हारा जामी पीतळ कांसै रा थाळ
चौथो फेरो लियो राज कंवार
चरू रै चढतां बाई नै टोकणा…..

जैतल दायजै में कांई कांई मांगै इण रै लारै अेक और बात आवै। कहीजै राजकंवरी जैतल रै बा सा कन्नै अेक भोत सोवणी, रूपाळी अर कळावंत डावड़ी ही जिण रो नांव ‘मरवणी’ हो। जैतल रा बा सा उण मरवणी री प्रीत में इस्या रम्योड़ा हा कै जैतल री मा नै बिसरायां राखता। बेटी लायण कांई करै, पण ब्याव रै बगत जैतल नै उण री माम्यां सीख दी, कै दायजै में उण मरवणी दासी नै मांग लेई जिण सूं थारी मां रै कीं सोरपाई हो जावै। जैतल दायजै में किण ढाळै मांग राखै, देखो-
देइयो म्हारा जामी जी घोड़लियां री घूम
हस्ती तो देइयो बाई नै झूमता
देइयो म्हारा जामी पीतळ कांसै रा थाळ
चरू रै चढतां बाई नै टोकणा
देइयो म्हारा जामी तीवळ पचास
आंगी तो ओढणिया देवो डेढ सौ
देइयो म्हारी जामी दासी मांयली दासी
दासी तो देइयो बाई नै ‘मरवणी’ जियो राज
बा सा सारी बात समझ जावै। बै आपरी बेटी सूं बूझै-
घाल्यो म्हारी बाई काळजियै नै हाथ
दासी तो नां देवां बाई ‘मरवणी’
कुण थान्नै देई बाई सीख
कुणां रै हुकमां सूं दासी मांगली
माम्यां म्हानै देई सीख
मामां रै हुक्मां सूं दासी मांगली

छेवट लोक मरजादा अर बेटी री मांग नै चेतै राखतां थकां राजाजी काळजो काठो कर’र मरवणी नै जैतल साथै दायजै में व्हिर कर देवै। सासरै पूग्यां जैतल री खूब आवभगत होवै। दासी मरवणी रै रूपजाळ में जैतल रै सासरैआळां नीं पजै इण सारू जैतल उण नै बरजती रैवै, सूनोडै़ महलां में अेकली नीं रैवणो। अेक दिन जैतल रै बडै जेठ सा रै घरां रातीजोगै होवै तो राज महल री सगळी लुगायां नूंतीजै। जैतल कन्नै ई नूंतो पूगै-
बड़ै जेठसा घर रातीजोगो
जैतल नै बुलावण जेठसा आइया
म्हारी तो जेठसा दुखै दोनूं आंख
दासी तो लेज्यो थे तो मरवणी

जेठसा घणा स्याणां हा, जैतल री पीड जाणता, जणा बै कैयो-
गुड़ बिना क्यां री चौथ
जैतल बिना क्यां रो रातिजोगो
जैतल रै हाल्यां रंगत लागसी
रातीजोगै रा देवा जागसी

अेक बात आ भी कहीजै कै जैतल म्हलां में किणी बात सूं रिसाणी होय’र आटी-पाटी लेय’र सोयगी। पछै बान्नै मनावण सारू पटराणी सणै दूजी राणियां मनावण पूगी जणा ओ गीत गाइज्यो-
जागो अे जैतल बाई, थान्नै जगावण आई
तातो सो पाणी ल्याई, तेल उबटणो ल्याई
न्हावो जैतल बाई, थान्नै नुहावण आई
पाट पीताम्बर ल्याई, तारां री चुनड़ी ल्याई
ओढो ओढो जैतल बाई, थान्नै उढावण आई
घिस घिस चनण ल्याई, लाल सिंदूर ल्याई
तिलक लगाओ जैतल बाई, थान्नै लगावण आई
सीरो तो पूड़ी ल्याई, गूंद रा लाडू ल्याई
जीमो अे जैतल बाई, थान्नै जिमावण आई
गुड़ बिना चौथ कदे नीं होवै,
जैतल बिन रातीजोगो नांई
चालो अे जैतल बाई, थान्नै बुलावण आई।

आज री हथाई रो सार ओ है, बेटी जलम्यां घर जैतल रै जलम सो हरख मनावणो चाहीजै, जणाई जैतल गावणै में सार है। आज घड़ी जरूरी है कै अे गीत आपणी बैन बेट्यां सीखै अर मौकै टोकै गावै, जणाई आपणी पिछाण बंचौला। रातीजोगै में गाइजण आळै गीतां रा रंग अर ठसक घणी न्यारी है, जैतल, जसमल ओडणी, मैंदी, नींद, काजळ कूकड़ो सरीखा गीत आपणी हेमाणी है, उण री साम्ह करो। जोगमाया री मैर बणी रैवै, आं गीतां पर आगली हथाई में…..। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो….।
-लेखक राजस्थानी व हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं



