






रूंख भायला.
राजी राखै रामजी ! 26 जनवरी रो उच्छब है काल, आधिकारिक रूप सूं आपणै देस रै बणनै रो दिन। कांई ठाह कित्ती अबखायां, कित्ता कित्ता भख होयो होसी, कुण कुण, कित्ती कित्ती खेचळ खाई होसी, जणा जाय’र आपां नै मिल्यो है आपणो आजाद देस, रूड़ौ राजस्थान। मातभौम सूं नेह आपणो जलमजात संस्कार है, कदास जणाई आपां गावां-
सोनै री धरती जठै जी, चांदी रो असमान
इसड़ौ रूपाळो है म्हारो प्यारो राजस्थान
ओ राजस्थान कद अर कियां बण्यो आज ‘हेत री हथाई’ में आपां इणी बाबत बंतळ करस्यां। देस री आजादी रै बगत मुरधर रै नांव सूं बाजतो ओ सगळो इलाको न्यारी-न्यारी रियासतां अर ठिकाणां में बंट्योड़ो हो। अंगरेजी राज में इण नै ‘राजपुताणो’ कैय’र बतळावता। ब्रिटिश सरकार तो आपरी फौज में ‘राजपुताना रेजिमेंट’ नांव री टुकड़ी भी थरपी ही।
तो बात सरू करां, आजादी रै बगत सूं….। उण बगत राजपुताणै में 19 रियासतां अर 3 छोटा ठिकाणा हा। अेक अंगरेजी चीफशिप रो इलाको ई हो मेरवाड़ा, अजमेर। आं रियासतां अर ठिकाणां रै मेळ सूं ई बणाइज्यो है आपणो रूड़ौ राजस्थान। कद अर कियां-कियां ? ओ भोत महताऊ सवाल है। आओ, गणतंत्र दिवस रै मोकै आज इण री पड़ताल ई कर लेवां।
राजपुताणै नै राजस्थान रो रूप कोई सोरो कोनी मिल्यो। न्यारा न्यारा राजा, बांरी न्यारी न्यारी मनगत। सगळां नै अेक ढब में ढाळनो खांडै री धार, इयां मानो डेडरिया तोळणा ! कदेई कोई कूदै तो कदेई कोई। पण फेर ई जोगमाया री मैर अर सरदार पटेल भेळै वीपी मेनन री सोच सूं सो कीं बदळतो गयो। देस री आजादी सूं थोड़ा’क दिन पैली 05 जुलाई 1947 नै रियासती विभाग री थरपना होई, जिण रा अध्यक्ष बणाइज्या सरदार पटेल अर सचिव रो भार सूंपीज्यो वीपी मेनन नै। आं दोनूं जणां रळ’र देस नै अेक करण में खासा खेचळ खाई। पटेल नै इणी कारणै ‘लौह पुरूस’ रै रूप में जाणिजै।
मोटोमोटी सात चरण में राजपुताणै सूं राजस्थान बणनै री जातरा पूरी होई। बगत री बात करां, तो 8 बरस, 7 महीना अर 14 दिनां लागग्या राजस्थान नै बणनै में, चेतै राख सको तो कुल जमा 3244 दिन !
18 मार्च 1948 नै पैलड़ै चरण में फगत 4 रियासतां भेळी होई। अलवर, भरतपुर, धौलपुर अर करौली, बां भेळै अेक ठिकाणो ‘नीमराणो ई आ रळ्यो। नांव धराइज्यो ‘मत्स्य संघ’। आप कैय सको, राजपुताणै सूं राजस्थान बणनै री खेचळ में पैलो पांवडो हो ‘मत्स्य संघ’।
इणै पछै दूजै चरण में 25 मार्च 1948 नै कोटा, बूंदी, झालावाड़, किशनगढ़, टौंक, प्रतापगढ़ डूंगरपुर, शाहपुरा अर बांसवाड़ा रियासतां नै रळा’र ‘राजस्थान संघ’ बणाइज्यो। इण संघ में ई अेक ठिकाणो कुशळगढ़ रळ्यो। इण संघ नै ‘पूरबी संघ’ ई कहिज्यो। आं रियासतां रै राजपूत राजावां नै मनावणै में सरदार पटेल रै खासा दोराई होई। बांसवाड़ा रा महारावळ चंद्रवीरसिंग जी तो अठै तंई कैय दियो, ‘म्हूं आपरी मौत रै फरमान पर दस्तखत कर रैयो हूं।’
तीजै चरण में 18 अप्रेल 1948 नै ‘राजस्थान संघ’ में उदयपुर री रियासत ई सामल होगी, नवो नांव धराइज्यो, ‘संयुक्त राजस्थान’। उदयपुर इण संघ री सैं सूं मोटी रियासत ही, इणी कारण बठै रा महाराणा भूपाळसिंग जी नै संघ रो राजप्रमुख बणाइज्यो जिका पांगळा हा।
राजस्थान रै गठन में चौथो चरण सैं सूं महताऊ गिणीजै। 30 मार्च 1949 नै राजपुताणै री चार सैं सूं मोटी रियासतां जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर अर बीकानेर रो भेळो होवणो अेक इचरज री बात ही। आं रियासतां भेळै अेक ठिकाणो ‘लावा’ ई रळाइज्यो। अबै संयुक्त राजस्थान में आं चार रियासतां रै मिलणै सूं रूप ई बदळग्यो, नवो नांव धराइज्यो, ‘वृदह राजस्थान’ ! खास बात आ कै, राजस्थान दिवस री थरपना ई इणी दिन यानी ‘30 मार्च’ नै मनाइजै।
15 मई 1949 नै गठन रै पांचवै चरण में ‘मत्स्य संघ’ अर वृहद राजस्थान नै रळा’र ‘संयुक्त वृदह राजस्थान’ बणाइज्यो अर छठै चरण में 26 जनवरी 1950 रै दिन लारै बच्योड़ी अेकली रियासत सिरोही ई रळगी अर अबै पैली बार नांव राखीज्यो ‘राजस्थान’ !
पण अजेस ई थोड़ी घणी रांद ही। 1 नवम्बर 1956 नै राजस्थान गठन रै सातवैं चरण में सगळी ब्याध्यां नै देस रै राज मिटायली। इण चरण में चीफशिप रो ‘मेरवाड़ा’ अर आबू तैसील राजस्थान में सामल करीजी। मध्यप्रदेश सूं सुनैला टप्पा रो इलाको राजस्थान में रळाइज्यो अर झालावाड़ रो सिरौंज इलाको मध्यप्रदेश नै पाछो सूंपीज्यो। इणी दिन देस रै संविधान में राजस्थान नै ‘ए’ श्रेणी रै राज्य री मानता मिली।
जद राजस्थान रै बणनै री बात ठाह लागगी है तो लोककवि कानदान कल्पित री ओळ्यां ई चेतै राख्या दिखाण-
आजादी रा रूखवाळा सूता मत रहिज्यो रे
आवैला कई मोड़ मारग में चलता ई रहिज्यो रे, बैवता ई रहिज्यो रे…..
बातां जद गेड़ चढै ठमै ई कोनी, पण बगत रो कैवणो है कै बाकी बातां आगली हथाई में. छब्बीस जनवरी री बधाई ! आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो.
-लेखक राजस्थानी व हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं





