



रूंख भायला.
राजी राखै रामजी! काल 21 फरवरी ही…., होवैला दूजां सारू जगती मायड़ भासा दिवस !! पण राजस्थानी भासाप्रेमियां सारू फगत झुरणै अर उदासी रो दिन। आ ई कोई बात है, देस रो राज म्हारी भासा नै नीं मानै !
पीड सूं भरीज्योड़ो अबै कांई कैवूं….30 बरस नेड़ै तो मन्नै होग्या झुरतां…देखतां…बांदरा बणतां…। जैपर सूं दिल्ली….जोधपुर सूं उदयपुर….बीकाणै सूं पिलाणी…..विधानसभा सूं संसद….सड़कां सूं गांव…..गांव सूं गवाड़…गवाड़ सूं ढाणी….. पण मानता री बात नीं बैठी अजे तंई…। म्हां सूं पैली आळी अेक पूरी पीढी जावती रैयी उडीकतां…उडीकतां…। व्यासजी सूं नरोत्तमजी…सेठिया जी सूं सुदामाजी….रावतजी सूं रेवतजी….सांवर जी सूं मोहन जी आलोक….सणै ओम जी कागद….घणाई नांव जिका राजमानता नै उडीकता हरिसरण होग्या, पण राज रो काळजो घणो काठो, बठै कद घोबा होवै इसी बात सूं ! रीसां बळतै अमनजी तो भोत धूड़ घाली है आपणै माजणै-
ओ सलूक देख हूक काळजै उठै
कूख आज ऊक चूक थूक मा गिटै
नां बंटै खंटै,
अेक दोय चार नीं सैंकडूं हजार नीं
किरोड किरोड जण जण्या है बांझ बापड़ी
माय बापड़ी….तेरी माय बापड़ी….मेरी माय बापड़ी…
संसद में प्रदेस रा पच्चीस धौळपोसिया नेता, जिकां री रगां रो लोई जाबक ई धोळो है, रै कारणै राजस्थानी भासा नै भारतीय संविधान मांय अजेस ठौड़ नीं मिल सकी है। जद कै दूजै प्रांतां रै लूंठै नेतावां डांग रै जोर सूं राजस्थानी सूं कठैई कमतर भासावां नै आठवीं अनुसूची मांय घलाय ली है। विधानसभा में बैठ्या दोय सौ नेतिया ई कम कठै, जे बै चावै तो आपणै प्रदेस री राजभासा बणावतै बान्नै कुण रोकै ! जे कोई इक्को दुक्को बातड़ी करै तो बेटा पारटीबाजी रै चक्करां में उण नै जूं जित्तो ई नीं गिणै….बान्नै तो रबड़ रा बोबा देवणा….कदेई हाथ आळा तो कदेई फूलआळा….।
पण आपां चुप हां क्यूंकै लातां खावणी अर हां जी, हां जी करणो आपणी आदत बणगी। आपणै ईं निबळैपणै अर धोळै लोई रै नेतियां नै सरकार चोखी तरियां पिछाणै है जणाई देस रो सै स्यूं मोटो राज्य होंवतां थकां ई राजस्थान प्रदेस आपरी मायड़ भासा री ओळखाण सारू लैरलै सौ बरसां स्यूं तरसै है। आं नेतावां सारू भागीरथसिंग भाग्य भोत जोरदार बात मांडी है-
आ रे साथी जतन करां ओ फसग्यो देस लफंगा में
अे काळै मूं रा धौळपोसिया हाथ गिचोळै गंगा में
प्रदेश में राजस्थानी भासा री मानता रै आन्दोलनां रो हरमेस ओ’इज नतीजो क्यूं निकळै, आ बात बिचारण जोग है। जद-जद विधानसभा का संसद में राजस्थानी रो प्रस्ताव आवै तो म्हारै नेतांवां रै अेन बगत पर जावण क्यूं लाग जावै, बांरी जीभ ताळवै स्यूं क्यूं चिपी रैवै ? भासा नै आपां मा बतावां, पण बै बेटा तो आपरी मा रा ई नीं हो सक्या। बात सीधी सी है, बै है बोटां रा बोपारी, बान्नै आपां आपणी गिच्ची झलांवांला तो बै आपरै बाधै नफै सारू सौदा ई करैला, मायड़ भासा सूं बां रो कांई लेवणो-देवणो ! थारी म्हारी सोचण री फुरसत बां कन्नै कठै है भई।
दोसी बै है, पण निरदोस तो आपां ई कोनी क्यूंकै वोटां री घड़ी आपां कदेई मायड़ भासा रै मान री बात बांरै सामीं ठोक बजा’र राखां ई कोनी। बोडोलैंड आंदोलन आळा लोग ‘पैली भासा पछै दूजा सगळा रासा’ री बात करी, अर बै लोग सरकार रै कण्ठां लाठी दे’र आपणी भासा नै मान दिरा’र लेयग्या।
आ बात नीं है कै आपां रा डोळ आपां स्यूं छान्ना कोनीं, पण आपां तो लुकणो चावां, सागण ई बीं कबूतरी दांई, जिको मिनकी नै देख’र आंख्यां मींच लेवै। आपां भासा रै मुद्दै नै बस भावना स्यूं जोड़ राख्यो है अर आपणी भावना ई फगत इत्ती सीक हैै किन्नै ई बतळा लेवो बो अेक ई बात कैयसी- ‘हां, मानता मिलणी तो चाइजै, ‘मानता देणी पडसी’ आ बात आज तांई आपां रै होठां पर आ ई नीं सकी। आणी ई नीं चाइजै, क्यूंकै आपां तो रो’र बोबो लेवणियां हां, पण आज री घड़ी खाली रोयां स्यूं बोबो नीं मिलै, मां रै खोळै मांय धिंगाणै जा’र बैठणो पडै ! हंस रा सम्पादक राजेन्द्र यादव आप रै अेक सम्पादकीय में लिख मेल्यो है, ‘जिकी भासावां फगत भावना स्यूं जुड़ी है बांरो भविख घणो आच्छो नीं है।’
चौफेर कचेड़्यां, तैसीलां, सरकारू दफ्तरां में तकावां तो उदास उभी भेड सी गामड़ जनता लाधै। आ है ई लातां खावण रै भाग री बापड़ी। मुण्डो उतार’ र कैवै ‘छोरो बेल्हो फिरै है ओ डावड़ां, बी. एड. करयोड़ो, कोई जुगत भिड़ाओ नीं, कठैई फसाओ नीं नौकरड़ी में….।’ इस्या ई छोरा है, सागी ईंट जिस्या खोरा….। आं डेड हुंस्यार गैलसप्पां नै कुण समझावै कै जुगत तो सित्तर बरसां स्यूं घणी भिड़ावां, पण जद बगत पडै़ तो थे चुस्को ई नीं…। म्हानै कांई लेवणो भासा रै आन्दोलन सूं ? कैबत कूड़ी थोड़ी है ‘भेड नै घी देवो तो कैवै, म्हारी आंख्यां फोड़ै है।’ थारै जी नै रोवां नीं घणाई, कै भासा नै मान दिराओ अर दूजा राज्यां दांई सरकारू नौकर्यां मांय पैली पांती पाओ। पण आप चेत्या कद ? भासा री बात सुणनै री बेल कठै है आप खन्नै। मूं करो हो पाट्योड़ी चा सो……।
मोहन आलोक सांची कैयो है- ‘भासा गई अर गया भेस ई बाकी रैयगी सांस…….।’ खाली सांसां चालती जूण मांय कद तांई जी स्यो लाडी, थारी जबान रै लाग्योड़ो ताळो कोई दूजो आ’र खोलै, इसी कांई अणसरी पड़ी है। कूटीज बो’करो अर रोयां राखो, कदास राज मिलै ई तो।
अरे गैलो, आ बात फगत भासा री नीं है। इण सारू चेत्यां आपणै टाबरां रो आगोत्तर भविख सुधर सकै, देस मांय आपां नै बरोबरी स्यूं जीवणै रो हक मिल सकै, कोर्ट कचेड़्यां में न्याव मिल सकै, आपणी पिछाण जीवती रैय सकै, मिनखपणै रा सैनाण बच सकै…..। सेठिया जी री बात चेतै करो दिखाण-
भासा है संजीवणी जे कोई हड़मान
ल्यावो उठ बैठ्यो होवै लिछमण राजस्थान
जे मिनख दांई जीवणो चावो तो मोटामोटी बात इत्ती सीक है कै वार्ड पंच सूं लेय’र सरपंच, विधायक, सांसद अर मंतरयां रा कान खैंचणा सरू करो, पूछो बान्नै कठै है म्हारी भासा ! पंचायती राज चुनाव आ रैया है, वोटां रै बौपार्यां नै ठोकबजा’र आपरी बात ढाळै कैवो ‘ बात करां डंकै री चोट, पैली भासा पछै बोट।’ जे कठैई लागै, बै आप नै फेरूं रबड़ रा बोबा दे रैया है तो आप सगळा भेळा हो’र बैई सागी बींटल्यां आगलै रै मूंडै मे घाल देवो, जको बोई लाई चूसबो’ करै आगलै चुनावां तंई…।
नींतर बणो माटी रा थेह्ड़, कुण रोकै है, कींरै खन्नै बेल्ह है…….। मायड़ भासा दिवस री बधाई किण मूंडै सूं देवूं ….। अबार रीसां में हूं, बाकी बातां आगली हथाई में। आपरो ध्यान राखो, रसो अर बसो।
-लेखक राजस्थानी और हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं







