



ग्राम सेतु ब्यूरो.
भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी नरेश कुमार गोयल ने जयपुर स्थित पंत कृषि भवन में विधिवत रूप से आयुक्त कृषि का कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने निवर्तमान आयुक्त चिन्मयी गोपाल को भावभीनी विदाई दी। पदभार संभालते ही नरेश गोयल ने स्पष्ट किया कि किसानों के हित उनके लिए सर्वाेपरि रहेंगे और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए नवाचार, तकनीकी विस्तार और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना कृषि विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने खरीफ और रबी फसलों के लिए ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर बैठे अंतिम किसान तक पहुंचे।
आईएएस नरेश गोयल ने कहा कि कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करना होगा। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे एक ओर किसानों की लागत घटेगी, तो दूसरी ओर उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
आईएएस नरेश गोयल ने जलवायु परिवर्तन को कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना समय की मांग है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे नवाचारों को प्रोत्साहित करें और प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए किसानों को नई तकनीकों से जोड़ें, ताकि खेती लाभ का व्यवसाय बन सके।
उधर, हनुमानगढ़ जिले के रावतसर कस्बे में खुशियां मनाई जा रही है। प्रबुद्ध लोगां का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने जज्बे, मेहनत और ठोस लगन के बल पर खास मुकाम हासिल करना और बिना किसी अहंकार के पीड़ितों की फरियाद का त्वरित समाधान करना, ऐसे अधिकारी विरले ही होते हैं। आईएएस नरेश गोयल इन्हीं में से एक हैं। मूल रूप से रावतसर निवासी नरेश गोयल को राजस्थान सरकार ने एक अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए कृषि एवं पंचायतीराज विभाग का आयुक्त नियुक्त किया है।
अपने प्रशासनिक तजुर्बे, अनुशासित कार्यशैली और परिणामोन्मुखी सोच के लिए पहचाने जाने वाले गोयल इससे पहले भी विभिन्न विभागों में अहम पदों पर रहते हुए उल्लेखनीय सेवाएं दे चुके हैं। वे अपने बड़े भाई, वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर गोयल को अपना आदर्श मानते हैं। इस संबंध में उनका एक कथन उनकी विनम्रता और व्यक्तित्व को बखूबी दर्शाता है। बकौल नरेश गोयल, ‘मैं अपनी चमड़ी के जूते बनाकर भी बड़े भाईसाब को पहनाऊं, तो भी इनके ऋण से उऋण नहीं हो सकता।’
स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। पूर्व पालिकाध्यक्ष नीलम सहारण का कहना है कि नरेश गोयल के नेतृत्व में विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा और किसानों व ग्रामीण आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं पूर्व विधायक धर्मेंद्र मोची, शिक्षाविद भवानीशंकर शर्मा और व्यंग्यकार मदन पेंटर ने कहा कि कस्बे के जिस लाडले सपूत को यह जिम्मेदारी मिली है, उससे कृषि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी है।
उनका कहना है कि क्षेत्र से गहरे जुड़ाव के चलते नरेश गोयल यहां केवल आईएएस अधिकारी नहीं, बल्कि बेटा और भाई बनकर आत्मीयता से लोगों से मिलते हैं। यही संवेदनशीलता और जमीनी समझ उन्हें एक अलग पहचान देती है।








