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राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की आहट के साथ ही जहां एक ओर सरकार आमजन को राहत देने के संदेश देने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर हनुमानगढ़ जिले में जल संसाधन विभाग का एक फैसला किसानों के गले की हड्डी बन गया है। जिले के विभिन्न नहर क्षेत्रों में पहले से ही असंतोष झेल रहे किसानों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। इसी कड़ी में भाखड़ा प्रणाली की एमएपी वितरिका के चक 6 एएमपी में मोघा क्षतिग्रस्त होने के मामले में जल संसाधन विभाग द्वारा लिया गया निर्णय संगरिया क्षेत्र में बड़ा विवाद बनता जा रहा है।
जल संसाधन खंड द्वितीय हनुमानगढ़ के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) मुकेश सिहाग ने इस मामले में चक 6 एएमपी के 81 किसानों की पानी की बारी एक वर्ष के लिए काटने का आदेश जारी कर दिया। यह आदेश सामने आते ही न सिर्फ किसान, बल्कि जनप्रतिनिधि भी सकते में आ गए। अब स्थिति यह है कि उच्चाधिकारी भी इस आदेश को सही ठहराने में जुटे नजर आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में मामला और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।
किसानों के अनुसार मोघा क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सबसे पहले उन्होंने ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी थी। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में जानकारी साझा की गई, ताकि विभाग समय रहते कार्रवाई कर सके। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों को मौके की जानकारी इसी के जरिए मिली, लेकिन तत्काल मरम्मत या जांच करने के बजाय विभाग ने सूचना देने वाले किसानों पर ही कार्रवाई का चाबुक चला दिया।
जल संसाधन उपखंड संगरिया के सहायक अभियंता (एईएन) ने 16 जनवरी को रिपोर्ट दी कि चक 6 एएमपी के मोघे को तोड़कर मशीन को क्षतिग्रस्त किया गया है। इसके बाद सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में संगरिया थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाया गया। लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले ही एक्सईएन ने किसानों को सामूहिक दंड देने का एलान कर दिया।
मोघा क्षतिग्रस्त होने से नहर संचालन में बाधा का हवाला देते हुए राजस्थान सिंचाई एवं जल निकास नियम 1954-55 के तहत एतराज नोटिस जारी किया गया। इसके बाद चक के कई किसान एईएन कार्यालय पहुंचे और स्पष्ट रूप से बयान दर्ज करवाया कि चक के किसी भी व्यक्ति ने मोघा नहीं तोड़ा है। किसानों ने यह भी कहा कि वे मोघा सही करवाने में विभाग का पूरा सहयोग करने को तैयार हैं।
इसके बावजूद, एईएन ने अपनी रिपोर्ट में यह उल्लेख किया कि 18 जनवरी से प्रस्तावित रेगुलेशन के तहत नहर चलाना संभव नहीं है और मोघे को सीज किया जाना चाहिए। इसी रिपोर्ट के आधार पर एक्सईएन ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि मोघा अनाधिकृत रूप से पानी की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से क्षतिग्रस्त किया गया है और इसमें चक के समस्त काश्तकार सम्मिलित हैं। इसके बाद राजस्थान सिंचाई जल निकास नियम 1955 की धारा 36 के नियम 31(2) के तहत चक 6 एएमपी के सभी काश्तकारों को एक वर्ष के लिए सिंचाई सुविधा से वंचित करने का निर्णय पारित कर दिया गया।
इस फैसले का असर केवल 81 किसानों तक सीमित नहीं है। इसके चलते क्षेत्र की करीब 800 बीघा बीघा कृषि भूमि सालभर के लिए सिंचाई से वंचित हो जाएगी। इसका सीधा असर फसलों के उत्पादन, किसानों की आय और पूरे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यही कारण है कि इस आदेश से क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी हैरान हैं और खुलकर सवाल उठा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जब नहर बंद थी, तब मोघा तोड़ने से किसी को क्या लाभ हो सकता था। इसके अलावा, मोघा क्षतिग्रस्त होने की सूचना खुद किसानों ने दी, न कि विभाग ने खुद खोजी। ऐसे में सभी किसानों को दोषी मान लेना न्यायसंगत नहीं है। किसानों का यह भी तर्क है कि नहर और मोघे की सुरक्षा की जिम्मेदारी जल संसाधन विभाग की है, न कि किसानों की।
किसानों का आरोप है कि एक साथ 81 किसानों पर कार्रवाई कर विभाग ने सीधे तौर पर ‘टकराव’ को न्योता दे दिया है। पंचायतीराज चुनाव से पहले इस तरह की सख्ती ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। अगर समय रहते इस फैसले की पुनर्समीक्षा नहीं हुई, तो संगरिया क्षेत्र में किसान आंदोलन और तेज होने से इनकार नहीं किया जा सकता। पानी के सवाल पर उठी यह चिंगारी अब बड़े आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।





