



ग्राम सेतु ब्यूरो.
जब सुर्खियाँ अक्सर सनसनी की बैसाखी पर टिकी हों, जब खबरों की दौड़ में संवेदना हाँफने लगे और मानव सरोकार फुटनोट बन जाएँ, तब समझ लेना चाहिए कि समाज किसी विचलन के मोड़ पर खड़ा है। ऐसे समय में अगर कोई पहल यह याद दिलाए कि पत्रकारिता सिर्फ सवाल दागने का औज़ार नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का दीपक भी है, तो वह साधारण घटना नहीं रहती, बल्कि एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप बन जाती है।
श्रीगंगानगर के टांटिया ग्रुप ने पत्रकारिता के इसी भूले-बिसरे मूल को पुनः केंद्र में लाने की एक सराहनीय पहल की है। समूह ने यह संकल्प लिया कि हर महीने उस पत्रकार को ‘पॉजिटिव जर्नलिज्म अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा, जिसने अपनी लेखनी के माध्यम से शासन-प्रशासन, किसी संस्था या व्यक्ति को सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और रचनात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित किया हो। यह पुरस्कार नकारात्मकता के शोर में सकारात्मकता की धीमी लेकिन स्थायी आवाज़ को पहचानने का प्रयास है।

इसी कड़ी में 22 दिसंबर को टांटिया विश्वविद्यालय परिसर में एक सादे, लेकिन भावनाओं से भरे समारोह का आयोजन किया गया। मंच सजा नहीं था, पर माहौल गरिमामय था। शब्दों से ज्यादा भाव बोल रहे थे। इस अवसर पर राजस्थान पत्रिका के उप संपादक पुरुषोत्तम झा को ‘पॉजिटिव जर्नलिज्म अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस पत्रकारिता का था जो खबर के भीतर इंसान को खोजती है।
समारोह में पुलिस उप अधीक्षक (ग्रामीण) भूपेंद्र सोनी, चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय के संस्कृत प्रोफेसर डॉ. श्यामलाल, भाजपा के जिला महामंत्री क्रांति चुघ सहित अनेक विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में इस पहल को समय की आवश्यकता बताया। वक्ताओं ने कहा कि मीडिया अगर समाज का आईना है, तो उसमें सिर्फ दरारें ही नहीं, रोशनी की किरणें भी दिखनी चाहिए।
सम्मान स्वीकार करते हुए पुरुषोत्तम झा ने कहा कि सकारात्मक पत्रकारिता का अर्थ सत्ता की प्रशंसा नहीं, बल्कि समाज के भीतर मौजूद अच्छे कार्यों, संघर्षों और समाधान की संभावनाओं को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व सिर्फ आलोचना करना नहीं, बल्कि आशा का बीज बोना भी है, ताकि समाज निराशा के दलदल में न धँसे। उन्होंने टांटिया ग्रुप का आभार जताया।
टांटिया यूनिवर्सिटी के आईईसी को-ऑर्डिनेटर डॉ. कृष्ण कुमार ‘आशु’ ने बताया कि टांटिया ग्रुप सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का पक्षधर है। पत्रिकारिता ही वह माध्यम से है, जिससे समाज सर्वाधिक प्रभावित होता है। इसलिए प्रबंधन ने सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए इस मासिक पुरस्कार श्रृंखला की शुरुआत की। उन्होंने पुरुषोत्तम झा की पत्रकारिता को सराहा और नवोदित पत्रकारों के लिए प्रेरणास्पद बताया।
कार्यक्रम में नितेश वर्मा और सरिता शर्मा ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत कर आभार व्यक्त किया। मंच संचालन जयनारायण पुरोहित ने सहजता और गरिमा के साथ किया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ी। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार गोपाल झा, संतोष त्रिपाठी, सतीश वधवा, डी-एडिक्शन सेंटर के डॉ. हेमंत सहारण, काउंसलर विकास रांगेरा, राजकीय कन्या महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर जसवीर सिंह सहित शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोग उपस्थित रहे।



