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अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर अखिल भारतीय महिला अग्रवाल सम्मेलन ने यह साबित कर दिया कि सेवा और संवेदना किसी दिखावे की नहीं, बल्कि मन के संस्कारों की बात होती है। सेवा विकलांग संस्थान में आयोजित विशेष कार्यक्रम ने न केवल दिव्यांग बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि समाज को यह याद भी दिलाया कि असली ताकत हाथ पकड़ने और दिल जोड़ने में है।
जिलाध्यक्ष एडवोकेट मिताली अग्रवाल की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन की शुरुआत बेहद आत्मीय माहौल में हुई। सम्मेलन की सदस्यों ने सेवा भाव को सर्वाेपरि रखते हुए बच्चों के बीच टोपियाँ, जुराबें, दस्ताने, फल और राशन सामग्री वितरित की। सामान भले एक सूची में गिना जा सकता है, लेकिन बच्चों की चमकती आँखें यह बता रही थीं कि उन्हें सिर्फ वस्तुएँ नहीं मिलीं, उन्हें अपनापन मिला है।

मिताली अग्रवाल ने कहा कि सेवा मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। उनका यह कथन साधारण नहीं, बल्कि अनुभव और मूल्यों से निकला विचार था। उन्होंने दिव्यांग बच्चों को ईश्वर की अनमोल देन बताते हुए कहा कि इन बच्चों में असीम क्षमताएँ होती हैं; उन्हें सिर्फ मार्गदर्शन, प्रेम और विश्वास की जरूरत होती है। उनके स्वर में वह दृढ़ता थी जो बताती है कि महिला अग्रवाल सम्मेलन सिर्फ आयोजनों की रस्म नहीं निभाता, बल्कि समाज में वास्तविक परिवर्तन की नीयत रखता है।
संगठन की जिला संरक्षक सरोज अग्रवाल, प्रचार मंत्री निशा मित्तल, तथा सक्रिय सदस्य रेणु गर्ग, अंजलि बंसल और रिंकल गर्ग ने पूरे मन से सहयोग दिया। इन महिलाओं का प्रयास यह दर्शाता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी आते हैं जब लोग बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाते हैं। इनकी भागीदारी केवल उपस्थिति नहीं थी, बल्कि सहभागिता थीकृजो आज के समय में सबसे दुर्लभ पर सबसे आवश्यक है।

कार्यक्रम का एक विशेष पहलू था गोविंद द्वारा प्रस्तुत मधुर भजन। उनके स्वर ने वातावरण में ऐसी आध्यात्मिक शांति घोल दी कि उपस्थित लोग कुछ क्षणों के लिए मानो सांसारिक भागदौड़ से मुक्त होकर अंदरूनी सुकून से भर गए। दिव्यांग बच्चों के साथ-साथ सदस्य भी भजनों की धुन में स्वयं को भावविभोर होने से रोक नहीं सके। यह साबित करता है कि संगीत किसी भी मन की दूरी को पल भर में मिटा देता है और इंसान को इंसान के थोड़ा और करीब ले आता है।

कार्यक्रम के अंत में संस्थान प्रमुख हेमन्त गोयल ने महिला संगठन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा किया गया सेवा कार्य अत्यंत सराहनीय है और इस प्रकार का सहयोग बच्चों में आत्मविश्वास तथा खुशी दोनों लाता है। उनकी बातों में वह सच्चा आभार था जो वर्षों की मेहनत और अपेक्षाओं के बाद समाज से मिला सहयोग देखकर उमड़ता है। पूरा कार्यक्रम प्रेम, संवेदना और सेवा की गहरी भावना के साथ इस तरह संपन्न हुआ कि यह केवल एक दिन का आयोजन न लगे, बल्कि आने वाले समय के लिए समाज को एक सीख दे जाए। ऐसे प्रयास यह याद दिलाते हैं कि दिव्यांगता किसी कमी का नाम नहीं; कमी तो संवेदनहीनता की होती है। और जब समाज में ऐसे संगठन मौजूद हों, तो उम्मीद हमेशा जिंदा रहती है। इस आयोजन ने सिद्ध कर दिया कि जब दिलों में दया और हाथों में सेवा हो, तो दुनिया किसी भी विशेष बच्चे के लिए अधिक सुंदर बन सकती है। आगे की राह भी इसी रोशनी की ओर बढ़ सकती है।


