





राजेश चड्ढ़ा
चढ़दी कला पँजाबी लोक अते पँजाबी साहित्य विच इक महत्वपूर्ण प्रगटावा है, जो इक अजेहे रवैये नूँ दर्शाैण लयी वरतेया जाँदा है जिस विच आशावाद अते भरपूर जोश हुँदा है। इसदा मोटे तौर ते अर्थ है जीवन अते भविख प्रति इक सकारात्मक, उत्साही अते आशावादी दृष्टिकोण।
चढ़दी कला अपणे धर्म प्रति जोश या उच्चे मनोबल दा प्रतीक है। सकारात्मक रवैया इक अजेहे मन दा प्रतीक है जो कदे निराश नहीं हुँदा, कदे हार नहीं मनदा अते कदे वी मुसीबताँ दे सामणे नहीं झुकदा। एह गुरुआँ द्वारा प्रचारेया गया प्यारा आदर्श भाव है, जिस लयी हर इक पँजाबी हर रोज अपणी अरदास विच प्रार्थना करदा है ‘नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला’।
नाम अजेही ताकत है, अजेही ऊर्जा है जो हमेशा असीम रहँदी है अते कदे वी घट नहीं हुँदी, भाँवे कोई किन्ना वी उसदा सेवन या श्रवण करे। गुरबाणी विच नाँ नूँ पवित्र जीवन शक्ति वजहों वी दर्शाया गया है, इक अजेही ताकत जो सर्वव्यापक हुँदे होये वी पारलौकिक है। एसे संदर्भ विच बाबा नानक, गुरु ग्रंथ साहिब विच गुरु मंत्र ‘इक ओंकार’ दी व्याख्या करदे होये आखदे हन कि गुरु ने मेरे घर लयी जो नींव रखी है, सदीवी है अते हर गुजरदे दिन दे नाल एह होर वी मज़बूत हुँदी जाँदी है।
चढ़दी कला सिधे तौर ते रवायती पँजाबी प्रार्थना या अरदास नाल सँबँधित है। ख़ालिस पँजाबी, नम्र दिल अते तँदरुस्त दिमाग़ नाल खालसा पंथ दी जित अते मनुखता दी भलाई लयी प्रार्थना करदा है। एह अरदास ब्रह्म इच्छा प्रति पूरी तरहाँ आज्ञाकारिता दी प्रतीक है।
चढ़दी कला मन दी अजेही उच्ची अते गौरवशाली अवस्था है जिस विच कोई डर, ईर्ष्या या दुश्मनी नहीं हुँदी। इस विच आत्म-सम्मान, सवायी खुशहाली अते आत्मा दी महिमा दा निरंतर ब्रह्म आनंद हुँदा है।
पँजाब दा इतिहास मुश्किल हालाताँ दे बावजूद, पँजाबीयाँ दे आशावाद यानी चढ़दी कला दे उदाहरणाँ नाल भरेया पेया है। पँजाबी हमेशा शांत, संतुष्ट, दिलेर, खुश, संयमित अते पूरी तरहाँ चढ़दी कला विच रहे हन। पँजाबियाँ वरगे आशावादी ज़िँदगी ज्यूण वाले लोक कदे वी दुश्मनी, खिलाफ़त अते एत्थों तक कि मौत तों वी नहीं डरदे। पँजाबी रुकावटाँ अते मुश्किलाँ नूँ ज़िँदगी दी सुँदरता मनदे हन अते इन्हाँ नूँ सफलता अते तरक्की दा राज़ मनदे हन। इक गुरुमुख हमेशा उच्ची आत्मा अते मन दी उच्ची अवस्था विच रहँदा है अते इक ब्रह्म जीवन जींदा है।
श्री गुरुनानक देव जी ने केहा है, कि चिंतन अते ध्यान नाल मुक्ति अते परम आनंद दी प्राप्ती हुँदी है। परमात्मा द्वारा निर्देशित व्यक्ति कदे वी हार दा सामना नहीं करदा।
बाबा नानक सिरजनहार अते नवीनताकारी सँत सन, जिन्हाँ दी पवित्र सोच अते कदराँ-कीमताँ दे इँकलाबी पारदर्शी मूल्यांकन ने उन्हाँ नूँ मनुखी किस्मत बारे डूँगी समझ प्रदान कीती। श्री गुरु नानकदेव जी ने मनुखाँ लयी भूत अते भविख दे विच इक वखरा सँबँध बणाया।
उन्हाँ ने अपणे ज्ञान नूँ दूजे धर्मां दी चेतना दी धारा विच शामिल कीता। उन्हाँ ने रचनात्मक ज्ञान अते सरगर्मीं दे अपणे सिद्धांताँ ते ज़ोर दिता, जिस विच उन्हाँ ने माँग कीती कि हर इक ज्ञानवान व्यक्ति नूँ खुद लयी ज्यौणा छड के समाज दी भलाई लयी कारज करणा चाहिदा है।
दसाँ गुरुआँ द्वारा दर्शाया गया अनुशासन इक सर्वव्यापी अनुशासन है अते शागिर्द नूँ अपणियाँ आध्यात्मिक ज़िम्मेदारियाँ दे नाल-नाल अपणे सांसारिक फ़र्ज़ां नूँ निभौण दी लोड़ हुँदी है। हर मनुख नूँ
शारीरिक, मानसिक अते आध्यात्मिक, तिन्नाँ पदराँ ते चौकस रहणा चाहीदा है। एह नैतिक अभ्यास सानूँ इक आदर्श व्यक्ति बणौंदा है। जिस विच सानूँ कर्म, ज्ञान अते भक्ति दा इक सम्पूर्ण जीवन प्राप्त हुँदा हैं, जिस नूँ हर मनुख इक चारदीवारी विच रखदा है। बाबा नानक कहँदे हन कि गुरुमुख या आदर्श व्यक्ति हमेशा चढ़दी कला विच ही रहँदा है। खुशहाल अवस्था नाल अपणियाँ हदाँ विच रहँदे होये अगे वधदे रहणा ही चढ़दी कला विच रहणा अते आदर्श जीवन ज्यौणा है।
-लेखक आकाशवाणी के पूर्व वरिष्ठ उद्धोषक और जाने-माने शायर हैं
