



ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान में भाखड़ा सिंचाई परियोजना और इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत आने वाली सिंचित कृषि भूमि के व्यापक भू-रूपांतरण को लेकर विधानसभा में गंभीर मुद्दा उठाया गया है। हनुमानग़ के विधायक गणेशराज बंसल द्वारा नियम 50 के तहत प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव में कहा गया है कि परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली बड़ी मात्रा में कृषि भूमि अब कृषि उपयोग में न रहकर आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और संस्थागत उपयोग में परिवर्तित हो चुकी है, इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में वह भूमि आज भी कृषि योग्य और सिंचाई योग्य मानी जा रही है।
प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि जिन क्षेत्रों में कृषि भूमि का भू-रूपांतरण हो चुका है, वहां वास्तविकता में सिंचाई जल का उपयोग संभव नहीं है। इसके बावजूद अभिलेखों में उक्त भूमि को सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराया जाना दर्शाया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि वास्तविक कृषकों को मिलने वाले पानी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विधायक गणेशराज बंसल ने मांग की है कि जिन कृषि भूमियों का उपयोग बदल चुका है, उनका रकबा प्रभावी कमांड एरिया से हटाया जाए। साथ ही, जो भूमि वास्तव में कृषि उपयोग में है और सिंचाई की पात्र है, उसे नए सिरे से प्रभावी सीसीए में जोड़ा जाए, ताकि जल वितरण न्यायसंगत और व्यावहारिक बन सके।
विधायक गणेशराज बंसल ने प्रस्ताव में यह भी कहा है कि जिन भूमियों का वर्षों पहले भू-रूपांतरण हो चुका है, वहां अब तक सिंचाई पानी का किस प्रकार उपयोग हुआ, इसकी गहन जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, यह सवाल भी उठाया गया है कि प्रभावी सीसीए में अब तक आवश्यक संशोधन क्यों नहीं किए गए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
खालों के अलाइनमेंट पर बढ़ते विवाद
भाखड़ा और आईजीएनपी परियोजनाओं के अंतर्गत कुछ खालों (नहरों) का अलाइनमेंट स्थानीय काश्तकारों द्वारा आपसी सहमति से नक्शों के विपरीत बदला गया था। समय बीतने के साथ कृषि भूमि में पारिवारिक बंटवारे और आंशिक बिक्री के कारण खेतों की सीमाएं बदल गईं। अब जब खालों के पुनर्निर्माण या पक्का करने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो पुराने और बदले हुए अलाइनमेंट को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
नक्शों की पुनः समीक्षा की मांग
विधायक बंसल ने प्रस्ताव के माध्यम से यह आग्रह किया है कि वर्तमान जमीनी स्थिति के अनुसार नहरों और खालों के नक्शों की पुनः समीक्षा कराई जाए, ताकि भविष्य में विवादों से बचा जा सके और परियोजनाओं का उद्देश्य पूरा हो। विधायक ने इन सभी मुद्दों को जनहित से जुड़ा बताते हुए नियम 50 के तहत विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराने की अनुमति देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिए गए, तो सिंचाई व्यवस्था, किसानों के अधिकार और सरकारी संसाधनोंकृतीनों पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। यह मामला राज्य की सिंचाई नीति और भूमि उपयोग व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत को रेखांकित करता है।








