


ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री मामले में गुरुवार को दूसरा पहलू सामने आया। टिब्बी एथेनॉल फैक्ट्री लगाओ, क्षेत्र में खुशहाली लाओ संघर्ष समिति ने उपखंड अधिकारी टिब्बी को पत्र सौंपकर 5 फरवरी को महापंचायत का एलान किया है। इसके लिए उन्होंने प्रशासन से अनुमति देने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है। समिति का कहना है कि फैक्ट्री का विरोध कर रहे कुछ लोग बाहरी तत्वों को बुलाकर शांतिपूर्ण इलाके के नागरिकों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि तहसील टिब्बी, जिला हनुमानगढ़ के गांव राठीखेड़ा के चक 5 आर.के. में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। समिति का कहना है कि फैक्ट्री के समर्थन में आवाज उठाने वालों को लगातार दबाव में लिया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन रहा है।
समिति ने पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि कुछ लोग बाहरी व्यक्तियों को बुलाकर स्थानीय नागरिकों को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है। समिति ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे तत्वों पर नजर रखी जाए और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। पत्र के अनुसार, 5 फरवरी को उपखंड कार्यालय टिब्बी के सामने महापंचायत आयोजित करने का प्रस्ताव है। समिति ने प्रशासन से आग्रह किया है कि इस आयोजन की विधिवत अनुमति दी जाए और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। समिति का कहना है कि महापंचायत के जरिए वे अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन और सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका दावा है कि एथेनॉल फैक्ट्री से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, किसानों को लाभ मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
इस पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर हनुमानगढ़, पुलिस अधीक्षक हनुमानगढ़, मुख्यमंत्री के निजी सचिव जयपुर और राजस्थान के गृह मंत्री को भी भेजी गई है। इससे साफ है कि समिति इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और हर स्तर पर अपनी बात रखना चाहती है। पत्र के अंत में साफ शब्दों में लिखा गया है, फैक्ट्री लगाओ, क्षेत्र बचाओ। यह नारा बताता है कि समिति एथेनॉल फैक्ट्री को विकास का साधन मान रही है और इसके विरोध को क्षेत्र के हितों के खिलाफ बता रही है।
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। एक तरफ विरोध करने वाले समूह हैं, दूसरी तरफ फैक्ट्री समर्थक समिति है, और बीच में शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है। महापंचायत को अनुमति मिलती है या नहीं, और सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम होते हैं, इस पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं। स्पष्ट है कि टिब्बी में एथेनॉल फैक्ट्री का मुद्दा सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं रहा, बल्कि यह अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मामला और गरमाने के आसार हैं।




