
रजनी शर्मा.
खेलो फाग, खेलो फाग,
खेलो फाग साँवरे।
छाया फागुन में अनुराग,
खेलो फाग साँवरे।
लाल, गुलाबी, नीले, पीले,
भाँति-भाँति के रँग रँगीले,
रँग करें गालों पर राज,
खेलो फाग, खेलो फाग,
खेलो फाग साँवरे।
परदेसी बालम जब आए,
होली का वो फगुआ लाए,
जागे यूँ गोरी के भाग,
खेलो फाग, खेलो फाग,
खेलो फाग साँवरे।
पिचकारी की धार निराली,
नैनों की है मार निराली,
गूँज उठा रँगों का राग,
खेलो फाग, खेलो फाग,
खेलो फाग साँवरे।
सबको अपने रँग में रँग लो,
छोटे-बड़े सभी को सँग लो,
भूलो जीवन के खटराग,
खेलो फाग, खेलो फाग,
खेलो फाग साँवरे।
खेलो फाग, खेलो फाग,
खेलो फाग साँवरे।
छाया फागुन में अनुराग,
खेलो फाग साँवरे।





