



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ के सरसब्ज इलाके में हरियाली की नई इबारत लिखने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिला मुख्यालय स्थित एकेडीयू कैंपस में 21 से 23 फरवरी तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय पंचगौरव कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। इस भव्य आयोजन का मकसद केवल एक मेला भर नहीं, बल्कि हनुमानगढ़ को कृषि के नक्शे पर एक मुकम्मल पहचान दिलाना है। जिस तरह डेजर्ट फेस्टिवल ने पर्यटन को नई ऊंचाइयां दीं, उसी तर्ज पर यह मेला हर साल आयोजित होकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाए, यही आयोजकों की मंशा है।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओपी बिश्नोई ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हनुमानगढ़ की कृषि क्षमता, नवाचार और संभावनाओं को देशभर के सामने पेश करने की एक संगठित कोशिश है। यह मेला किसानों के लिए महज तमाशा नहीं, बल्कि तरक़्क़ी का रास्ता है।
यह राष्ट्रीय स्तर का कृषि मेला जिला प्रशासन, एमएसएमई और श्री खुशालदास विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। प्रशासनिक सहयोग, शैक्षणिक मार्गदर्शन और उद्योग जगत की भागीदारी तीनों मिलकर इस आयोजन को वक़ार और वुसअत देने का काम करेंगे। मेले का मुख्य फोकस किसानों को उन्नत बीज, स्मार्ट फार्मिंग तकनीक, आधुनिक कृषि उपकरण, कृषि स्टार्टअप, सरकारी योजनाओं और निर्यात के अवसरों से जोड़ना है। साफ शब्दों में कहें तो यह मेला खेती को परंपरा से निकालकर प्रोफेशन बनाने की कोशिश है।
एसकेडी यूनिवर्सिटी के चेयरमैन बाबूलाल जुनेजा ने खेती को लेकर प्रचलित नकारात्मक सोच पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि खेती को घाटे का सौदा मानना सरासर गलत है। आज देश में ऐसे कई मिसालें मौजूद हैं, जहां किसान कम जमीन में भी नई तकनीक और सही जानकारी के दम पर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
उनका कहना था कि यह मेला किसानों को वही इल्म और हुनर देने का जरिया बनेगा, जिससे खेती फायदे का सौदा बन सके। मेले में राजीविका से जुड़ी महिलाएं, प्रगतिशील किसान और एमएसएमई के प्रतिनिधि भी शिरकत करेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
मेले का एक अहम आकर्षण 22 फरवरी को आयोजित होने वाली एक्सपोर्ट मीट होगी। इसमें चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़ी डॉ. सुषमा व्यापारियों और किसानों को निर्यात की बारीकियों से रूबरू कराएंगी। यह सत्र किसानों को स्थानीय मंडी से निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यहां किसानों को बताया जाएगा कि किस तरह उनकी उपज वैश्विक मांग के मुताबिक तैयार हो सकती है और कैसे निर्यात से उनकी आमदनी में इज़ाफ़ा किया जा सकता है।
मेले में देशभर से आए कृषि वैज्ञानिक विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। आधुनिक खेती, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। नई तकनीकों का विकास करने वाले संस्थानों के कुल 25 स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां किसान सीधे विशेषज्ञों से बातचीत कर सकेंगे। पशुपालन के क्षेत्र में नस्ल सुधार के लिए सेक्स सीमन और आईवीएफ तकनीक पर लाइव प्रदर्शन और चर्चा भी होगी। यह उन पशुपालकों के लिए खास होगा, जो परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक पद्धति अपनाना चाहते हैं।
मेले में जैविक खेती, कृषि स्टार्टअप और स्वरोजगार पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों का उद्देश्य युवाओं को खेती से जोड़ना और उन्हें रोजगार के नए मौके दिखाना है। खेती यहां रोज़ी-रोटी ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का जरिया बनकर सामने आएगी।
खेती की बातों के साथ-साथ मेले में तहज़ीब और तफरीह का भी पूरा इंतजाम रहेगा। 21 फरवरी को मशहूर सूफी गायिका मन्नत नूर अपनी सूफियाना आवाज़ से समां बांधेंगी। वहीं 22 फरवरी को लोकप्रिय कलाकार राज मावर लोकसंगीत की रंगीन महफिल सजाएंगे।
आयोजकों का यक़ीन है कि यह राष्ट्रीय पंचगौरव कृषि मेला किसानों की आय बढ़ाने, नई सोच पैदा करने और ग्रामीण विकास को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगा। इस मौके पर उपनिदेशक (आत्मा) सुभाष डूडी, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. आनंद कुमार और पीआरओ राजपाल लंबोरिया भी मौजूद रहे।








