



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ स्थित श्रीखुशालदास विश्वविद्यालय में 21, 22 और 23 फरवरी को ‘पंचगौरव: अन्नदाता से अन्नपूर्णा तक का समृद्धि-पथ’ विषय पर भव्य कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन जिला प्रशासन हनुमानगढ़, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग तथा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में होगा। तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और उपभोक्ता तक की संपूर्ण श्रृंखला को एक ही मंच पर प्रस्तुत करेगा।
आयोजन से पूर्व विश्वविद्यालय परिवार द्वारा पीले चावलों के माध्यम से घर-घर जाकर स्नेहपूर्वक निमंत्रण दिया गया। भारतीय परंपरा से जुड़ी इस पहल ने मेले को जन-जन का उत्सव बनाने का संदेश दिया है। यह केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक आत्मीयता का प्रतीक भी है।
श्री गुरु गोविंद सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने बताया कि यह कृषि मेला किसानों, उद्यमियों और युवाओं के लिए समृद्धि का सशक्त माध्यम सिद्ध होगा। उनके अनुसार ‘अन्नदाता से अन्नपूर्णा तक’ की संकल्पना खेती को व्यापक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास है। आज कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, विपणन और घरेलू उपयोग तक फैली एक समग्र व्यवस्था है। यदि किसान इस पूरी श्रृंखला से जुड़ते हैं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
मेले में आधुनिक कृषि उपकरण, जैविक खेती के मॉडल, फसल विविधीकरण, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि आधारित उद्यमों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सत्र, परिचर्चाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य किसानों को व्यवहारिक ज्ञान देना तथा युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करना है।
यह आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जब किसान उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़ेंगे, तब स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे पलायन की समस्या में कमी आएगी और गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। महिला स्वयं सहायता समूहों को भी अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और विपणन का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय और आत्मनिर्भरता में वृद्धि होगी।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष वरुण यादव ने कहा कि पीले चावलों के माध्यम से दिया गया निमंत्रण भारतीय संस्कृति की आत्मीय परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने जिले के किसानों, महिला समूहों, युवाओं और नागरिकों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर इस कृषि महोत्सव को सफल बनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से ही यह आयोजन अपने उद्देश्य को पूर्ण कर सकेगा।
‘पंचगौरव’ कृषि मेला केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और अवसरों का संगम है। यह कृषि को आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और समृद्धि से जोड़ने का प्रयास है। यदि ऐसे आयोजन निरंतर होते रहें, तो हनुमानगढ़ जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई दिशा स्थापित हो सकती है। तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव खेत से रसोई तक की यात्रा को सजीव रूप में प्रस्तुत करेगा और किसानों को यह संदेश देगा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और सामूहिक प्रयास से समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।







