



ग्राम सेतु ब्यूरो.
राजस्थान में इस रबी सीज़न में सरकारी मशीनरी उर्वरकों पर ऐसे चिपकी है जैसे किसान पहली बारिश पर आसमान की तरफ देखते हैं। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पूरे सिस्टम को साफ संदेश दे दिया, ‘उर्वरक चाहिए तो मिलेगा, लेकिन खेल-तमाशा नहीं चलेगा।’ राज्य भर में उपलब्धता रोजाना स्कैन की जा रही है, और जिन जिलों में मांग ज्यादा है, वहां सप्लाई पहले पहुँचाई जा रही है। इस बार कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर सरकार नरमी दिखाने के मूड में नहीं; विभागीय टीमें पूरे प्रदेश में कड़ी निगरानी लिए घूम रही हैं।

केंद्र से समन्वय भी तेज़ किया गया है। सरकार दावा कर रही है कि किसानों को यूरिया की कमी नहीं होने दी जाएगी। अक्टूबर-नवंबर के लिए तय आवंटन से भी ज्यादा स्टॉक मैदान में उतारा जा चुका है। करीब 9 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता के साथ राज्य रिकॉर्ड सप्लाई की बात कर रहा है। फॉस्फेटिक उर्वरकों का स्टॉक भी पिछले साल से 69 हजार मीट्रिक टन ऊपर है, जो खुद सरकार ने एक तरह की उपलब्धि की तरह पेश किया है।

जिलावार सप्लाई में भी सरकार ने दिखाया है कि मांग से ऊपर जाकर माल भेजा जा सकता है। बारां, झालावाड़, बूंदी, अलवर, भीलवाड़ा जैसे जिलों में तय मांग से हजारों टन यूरिया ज्यादा डाली गई। प्रतापगढ़ में धरियावद क्षेत्र के लिए भी विशेष आपूर्ति भेजी जा रही है, ताकि किसान लाइन में खड़ेदृखड़े फसल का वक्त खराब न करें।

उधर, कृषि विभाग की प्रमुख सचिव मंजू राजपाल ने अब पूरा फोकस दो चीज़ों पर रखा है, पारदर्शी वितरण और कठोर कार्रवाई। हर विक्रेता की दुकान पर विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी फिक्स है, लंबी लाइन होने पर खुद सरकारी कर्मचारी किसानों को लाइन में खड़ा कर उर्वरक दिलवा रहे हैं। राज्य की सीमाओं पर 61 चौकियां लगा दी गई हैं, ताकि कोई भी रात के अंधेरे में ट्रक घुमा कर उर्वरक बाहर न ले जा सके।
इस पूरे अभियान का नया चेहरा यही है, सरकार चाहती है कि इस बार उर्वरक न किसी की तिजोरी में बंद पड़े, न किसी ब्लैक मार्केट की जेब में जाए, सीधा खेत में पहुँचे, वहीं जहाँ इसकी असली जरूरत है।


