





ग्राम सेतु ब्यूरो.
मनरेगा का नाम बदलते ही राजस्थान की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस जहां इसे जनहित से हटकर ‘नाम बदलने की राजनीति’ बता रही है, वहीं बीजेपी ने इस मुद्दे को सीधा जनता के बीच ले जाने का ऐलान कर दिया है। इसी क्रम में 25 जनवरी को हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय स्थित भाजपा कार्यालय में प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल ने पत्रकार वार्ता कर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और पार्टी की रणनीति सार्वजनिक की। कैलाश मेघवाल ने कांग्रेस की नाराजगी को ‘राजनीतिक घबराहट’ करार देते हुए कहा कि जब भी मोदी सरकार जनहित में कोई बड़ा फैसला लेती है, कांग्रेस को तकलीफ होने लगती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को डर सताने लगता है कि जनता अब बीजेपी के साथ खड़ी हो जाएगी, ‘मोदी भक्तों’ की तादाद बढ़ जाएगी और कांग्रेस का नामो-निशान मिट जाएगा।
प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल ने मनरेगा के नए नाम की घोषणा करते हुए कहा कि अब इस योजना को ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कहा जाएगा, जिसका संक्षिप्त नाम ‘वीबी-जी राम जी’ होगा। इस पर कांग्रेस की आपत्ति को लेकर मेघवाल ने सीधा वार किया। कहाकि कांग्रेस को राम के नाम से परहेज है, इसलिए ज्यादा परेशानी हो रही है।
मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाया जाए। उसी दिशा में योजनाओं का स्वरूप बदला जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 100 दिन की बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी और मजदूरों को साप्ताहिक भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। उनके अनुसार देश तभी विकसित होगा जब हर ग्राम पंचायत और हर आम नागरिक आर्थिक रूप से मजबूत होगा।
कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए बीजेपी नेता अमित चौधरी ने कहा कि कांग्रेस आम जनता को गुमराह कर रही है, जबकि सच्चाई इसके उलट है। इसी कारण बीजेपी अब कांग्रेस के ‘दुष्प्रचार’ को बेनकाब करने के लिए मैदान में उतरेगी। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी प्रदेश स्तर से लेकर मंडल और ग्राम स्तर तक सम्मेलन आयोजित करेगी। मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों के बीच जाकर योजना की वास्तविक तस्वीर रखी जाएगी और इसके लाभ सीधे बताए जाएंगे।
प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल ने दावा किया कि नए ढांचे के तहत मनरेगा में अब धांधली की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अब अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी और टिकाऊ कार्य होंगे। ग्राम पंचायतें अपनी ग्राम सभाओं में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करेंगी। सरपंच से लेकर हर जनप्रतिनिधि और अधिकारी को जवाबदेह बनाया जाएगा। जल संरक्षण, आजीविका सृजन और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी।
नाम बदलने की राजनीति पर कांग्रेस के आरोपों को पलटते हुए मेघवाल ने कहा कि नाम बदलने का खेल खुद कांग्रेस दशकों से खेलती आई है। अब जब सरकार वास्तविक सुधार कर रही है, तो कांग्रेस को तकलीफ हो रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि आगामी चुनावों में बीजेपी की जीत तय है और कांग्रेस की हार निश्चित। कांग्रेस की बातें सुनने वाला अब कोई नहीं बचा।
पत्रकार वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू, अमित चौधरी, सुशील गोदारा, प्रदीप ऐरी सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। कुल मिलाकर साफ है कि मनरेगा का नाम बदलना सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले बीजेपी और कांग्रेस के बीच बड़ा सियासी हथियार बन चुका है और इसकी लड़ाई अब सड़कों से लेकर गांव की चौपाल तक लड़ी जाएगी।







