



ग्राम सेतु ब्यूरो.
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित टीबी एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा किसान आंदोलन फिर तूल पकड़ता जा रहा है। संघर्ष समिति के आह्वान पर 11 फरवरी यानी बुधवार को तलवाड़ा झील स्थित अनाज मंडी में महापंचायत की जाएगी। समिति ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि फैक्ट्री का एमओयू रद्द करने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांगों को प्रशासन ने लिखित रूप में स्वीकार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संघर्ष समिति के सदस्य मंगेज चौधरी ने बताया कि प्रशासन की ओर से अब तक केवल मौखिक आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों को अब कागजी और ठोस निर्णय चाहिए। उन्होंने कहा कि बार-बार भरोसा दिलाने के बावजूद कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया, जिससे लोगों में असंतोष और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। चौधरी ने स्पष्ट किया कि यदि महापंचायत से पहले या उसके दौरान भी मांगों पर लिखित आदेश नहीं मिले, तो रेलवे ट्रैक और प्रमुख सड़कों को जाम किया जाएगा।
मंगेज चौधरी ने दो टूक कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन व सरकार की होगी। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल एक फैक्ट्री के विरोध तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों के अस्तित्व, स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा का सवाल बन चुकी है।
किसान नेता मंगा सिंह ने बताया कि महापंचायत में आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में किसान, मजदूर और ग्रामीण पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है और इसके लिए गांव-गांव में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें घर-घर जाकर लोगों को महापंचायत में शामिल होने का निमंत्रण दे रही हैं।
जगजीत सिंह जग्गी ने कहा कि ग्रामीणों में भारी रोष है और यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र का जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि लोग खुद आगे बढ़कर आंदोलन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और किसी भी कीमत पर अपनी जमीन, पानी और सेहत से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।
महापंचायत की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को संघर्ष समिति के नेताओं ने विभिन्न गांवों का दौरा किया। मंगेज चौधरी, मदन दुगेसर, मंगा सिंह, जगजीत सिंह, ओम दुगेसर, रवि जोसन, सुखजीत और बलजिंदर सिंह सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और ग्रामीणों से बड़ी संख्या में तलवाड़ा पहुंचने की अपील की। नेताओं ने बताया कि महापंचायत को ऐतिहासिक बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने भी इस मुद्दे को लेकर आमजन से शांति बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि संघर्ष समिति के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है और इसी क्रम में समिति के पदाधिकारियों को 9 और 10 फरवरी को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सरकार जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थानीय लोगों की भावनाओं को लेकर संवेदनशील है।
प्रशासन के अनुसार, इस मामले में गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा एथेनॉल प्लांट का निरीक्षण किया जा चुका है और संघर्ष समिति के सदस्यों से बातचीत कर उनकी आशंकाओं को समझा गया है। समिति अपनी रिपोर्ट शीघ्र ही सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि संघर्ष समिति का कहना है कि जब तक मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक आश्वासन का कोई महत्व नहीं है। आंदोलनकारियों का मानना है कि पहले भी कई बार बातचीत और भरोसे के नाम पर समय टाला गया है। ऐसे में अब आर-पार की लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
11 फरवरी की महापंचायत को लेकर पूरे इलाके में हलचल तेज है। एक ओर प्रशासन हालात को शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर किसान और ग्रामीण अपने हक के लिए निर्णायक संघर्ष के मूड में नजर आ रहे हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह आंदोलन वार्ता से सुलझेगा या सड़कों और रेल पटरियों तक पहुंचेगा।






