




एडवोकेट रोहित अग्रवाल
राजस्थान बजट 2026 राज्य के समग्र विकास का एक विस्तृत दृष्टिपत्र प्रस्तुत करता है। इसमें आधारभूत संरचना, जल प्रबंधन, ऊर्जा विस्तार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा जैसे विविध क्षेत्रों को व्यापक रूप से समाहित किया गया है। यह बजट एक ओर भविष्य की तकनीक और आधुनिक व्यवस्थाओं की ओर अग्रसर दिखता है, तो दूसरी ओर जनकल्याण को भी केंद्र में रखता है। किंतु इस विकासगाथा के मध्य एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरता है, क्या राज्य के औद्योगिक वर्ग को सुरक्षित, स्थिर और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करने की दिशा में पर्याप्त कदम उठाए गए हैं? यदि उद्योग ही आशंकित रहेंगे, तो आर्थिक प्रगति की गति कैसे स्थिर रह पाएगी?
दरअसल, राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत यह बजट अनेक दृष्टियों से महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी प्रतीत होता है। सड़क सुरक्षा से लेकर ग्रामीण पेयजल तक, शहरी कायाकल्प से लेकर युवाओं के स्वरोजगार तक लगभग हर क्षेत्र को इसमें स्पर्श करने का प्रयास किया गया है। राज्य को आधारभूत सुविधाओं से सशक्त बनाने का स्पष्ट संकल्प इस दस्तावेज़ में झलकता है।

बजट में 16,430 किलोमीटर नई सड़कों, 20,000 किलोमीटर राज्य राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण, 500 किलोमीटर नए पुल एवं बाईपास तथा 15 रेलवे ओवरब्रिज एवं रेल अंडरब्रिज का प्रावधान दर्शाता है कि सरकार सड़क नेटवर्क को आर्थिक विकास की धुरी मान रही है। वर्ष 2027 तक सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु में 90 प्रतिशत कमी का लक्ष्य अत्यंत महत्वाकांक्षी है। 2,000 निगरानी कैमरों की स्थापना, हृदय पुनर्जीवन प्रशिक्षण को वाहन अनुज्ञा पत्र से जोड़ना तथा 250 नई रोगी वाहन सेवाएँकृये सभी कदम जनसुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
शहरी विकास हेतु 3,000 करोड़ रुपये, जल निकासी व्यवस्था पर 1,020 करोड़ रुपये, 7 लाख नवीन मार्ग प्रकाश तथा जयपुर के लिए पृथक 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान नगरों को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
राज्य में 24,000 करोड़ रुपये की पेयजल योजनाएँ, 6,500 गांवों को ‘हर घर नल’ से जोड़ने की पहल, चलित जल परीक्षण प्रयोगशालाएँ तथा ग्रीष्मकालीन जल संकट के लिए जिला अधिकारियों को विशेष निधि ये सभी उपाय जल सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य, 1,400 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र, छतों पर सौर ऊर्जा प्रोत्साहन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विद्युत निगरानी व्यवस्था राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर सकती है। यह स्पष्ट है कि सरकार पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजनाएँ बना रही है।
91 लाख नागरिकों को पेंशन योजना से लाभान्वित करना, किसानों के लिए 10,900 करोड़ रुपये की सहायता, युवाओं को 10 लाख रुपये तक ब्याज रहित व्यवसाय ऋण ये घोषणाएँ सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। शिक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं विज्ञानदृप्रौद्योगिकी आधारित अध्ययन, ‘चल विद्यालय’ जैसी पहलें ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में हृदयाघात उपचार सुविधा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता, बाल गहन चिकित्सा इकाई और ‘मोक्ष वाहिनी’ जैसी योजनाएँ संवेदनशील प्रशासन की झलक प्रस्तुत करती हैं।
5,000 करोड़ रुपये की पर्यटन महायोजना, शेखावाटी की हवेलियों को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास, जैसलमेर में अति विलास पर्यटन क्षेत्र तथा जन सेवा केंद्रों का संवाद माध्यम पर विस्तार, ये सभी पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती हैं। पर्यटन रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
इन सब सकारात्मक घोषणाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कमी स्पष्ट दिखाई देती है, उद्योगों की सुरक्षा और संरक्षण के विषय में ठोस नीति का अभाव। वर्तमान समय में अनेक उद्योगपति प्रशासनिक जटिलताओं, अनावश्यक जांच, विधि व्यवस्था की चुनौतियों और स्थानीय विरोध का सामना कर रहे हैं। यद्यपि नए औद्योगिक क्षेत्र, तैयार आधारभूत सुविधाएँ और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारे जैसे प्रावधान किए गए हैं, फिर भी उद्योगों को सुरक्षित और स्थिर वातावरण प्रदान करने की दिशा में स्पष्ट आश्वासन का अभाव निराशाजनक है।
इसके अतिरिक्त, पुरानी बकाया ब्याज अनुदान की समस्या लंबे समय से लंबित है। अनेक उद्योगों की पूंजी इसी कारण अटकी हुई है, जिससे विस्तार और नए निवेश की क्षमता प्रभावित हो रही है। बजट में इस विषय पर ठोस प्रावधान न होना औद्योगिक वर्ग के लिए चिंता का विषय है।
समग्र रूप से देखा जाए तो राजस्थान बजट 2026 विकासोन्मुख, जनकल्याणकारी और भविष्यद्रष्टा बजट है। यह आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा और तकनीकी उन्नति की मजबूत नींव रखता है। किंतु यदि राज्य को वास्तविक अर्थों में उद्योग अनुकूल बनाना है, तो उद्योगों की सुरक्षा, विश्वास और लंबित वित्तीय दायित्वों विशेषकर बकाया ब्याज अनुदान पर ठोस और त्वरित निर्णय लेने होंगे। सुदृढ़ और सुरक्षित उद्योग ही स्थायी आर्थिक प्रगति के आधार बन सकते हैं; इनके बिना विकास का स्वप्न अधूरा ही रहेगा।
-लेखक जाने-माने कर सलाहकार व टैक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं






