



ग्राम सेतु ब्यूरो.
जब फरियाद सुनने की कुर्सियां ऊंची हो जाएं, तो आवाजें पैरों से चलकर पहुंचती हैं। गांव 2 केएनजे के ग्रामीणों ने यही किया। मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी से परेशान ग्रामीण नंगे पांव चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इस अनोखे लेकिन सशक्त विरोध का नेतृत्व रणवीर सिहाग ने किया, जिनके साथ सैकड़ों ग्रामीण गांव की आबादी क्षेत्र से चलकर प्रशासन के दरवाजे तक पहुंचे।
गांववासियों का कहना था कि 2 केएनजे को नगर परिषद की सीमा में शामिल किए जाने के बावजूद आज तक बुनियादी सुविधाएं कागजों से बाहर नहीं आ सकीं। पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों के नंगे पैर प्रशासन की संवेदनशीलता पर सीधा सवाल बनकर उभरे।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि गांव की अधिकांश गलियां और आम रास्ते आज भी कच्चे हैं। जो सड़कें वर्षों पहले बनी थीं, उनकी हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे आमजन ही नहीं, स्कूल जाने वाले बच्चों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं, तो कई बार अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से हिचकते हैं।
गांव के दो-तीन मुख्य रास्तों पर बनी पुलिया भी अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। कई स्थानों पर पुलिया टूटने से वाहनों के फंसने की घटनाएं आम हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर गुजरता दिन किसी बड़े हादसे की आशंका बढ़ा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
गांव में नालियों की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। बरसात का पानी और घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर ही फैल जाता है। इससे न सिर्फ गंदगी बढ़ रही है, बल्कि बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। बदबू और कीचड़ के बीच जीवन जीना ग्रामीणों की मजबूरी बन चुका है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सरकार ने करीब 60 लाख रुपये की लागत से गांव में पंचायत भवन का निर्माण करवाया था, लेकिन वह आज तक बंद पड़ा है। न वहां कोई अधिकारी बैठता है, न कर्मचारी। नतीजा यह कि मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए ग्रामीणों को नगर परिषद के चक्कर काटने पड़ते हैं। यह भवन ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता की मिसाल बन गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब गांव पंचायत था, तब पंचायत द्वारा निशुल्क पट्टे दिए गए थे। नगर परिषद में शामिल होने के बाद वे पट्टे अपने कब्जे में ले लिए गए और आज तक दोबारा वितरित नहीं किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई लोगों को पहली किश्त तो मिली, लेकिन बाद की किश्तें नहीं आईं। इससे कई मकान अधूरे रह गए और मजबूरी में लोगों को अपनी जेब से निर्माण पूरा करना पड़ा।
मनरेगा के कार्य बंद पड़े हैं, जिससे मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे स्थानों पर पलायन करना पड़ रहा है। गांव के जोहड़ पायतन में पहले लगाए गए दो बोरवेल भी बंद पड़े हैं, जिससे पानी की समस्या और गहरा गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि इन सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाए और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
इस पदयात्रा में रणवीर सिहाग, विकास शर्मा, राजेन्द्र सुथार, उत्तम नेहरा, मुकेश कुमार, सुखप्रीत सिंह, जसु सिंह, हरदीप सिंह, महेन, राजेन्द्र झाझरिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। नंगे पैरों से निकली यह पदयात्रा साफ संदेश छोड़ गई, अब गांव 2 केएनजे सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहता है।








