




ग्राम सेतु ब्यूरो.
कभी-कभी किसी सभागार में सिर्फ कुर्सियां नहीं भरतीं, वहां वर्षों की साधना, संघर्ष और सिद्धि भी एक साथ बैठ जाती है। ऐसा ही दृश्य टैक्स जगत में उस वक्त सजीव हुआ, जब टैक्स बार एसोसिएशन हनुमानगढ़ ने अपने सीनियर सदस्यों के सम्मान में एक अनूठा और भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया। ‘अनुभव का उत्सव, सम्मान का अवसर’ नाम से आयोजित यह समारोह सिर्फ अभिनंदन नहीं था, बल्कि उस परंपरा का सार्वजनिक स्वीकार था, जिसने संस्था को विचार, विवेक और विश्वसनीयता दी।
चार दशक से अधिक समय से कर कानून की जटिल गलियों में रास्ता दिखाने वाले 16 वरिष्ठ अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को जब मंच पर आमंत्रित किया गया, तो तालियों की गूंज में केवल उत्साह नहीं, बल्कि कृतज्ञता की स्पष्ट ध्वनि सुनाई दी। यह वही पीढ़ी है जिसने संस्था की नींव रखी, उसे मजबूती दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए मूल्य तय किए।
समारोह की खास बात यह रही कि सीनियर्स ने एक स्वर में इसे बीकानेर संभाग में अपनी तरह का पहला आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल सम्मान नहीं, बल्कि संगठन की वैचारिक परिपक्वता और आपसी एकता का प्रमाण है। वरिष्ठों के चेहरे पर संतोष थाकृवह संतोष, जो वर्षों की मेहनत के बाद मिलता है, जब अगली पीढ़ी आपके योगदान को पहचानती है।

टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट रोहित अग्रवाल ने कहा कि किसी भी संस्था की असली ताकत उसकी एकजुटता होती है। उन्होंने कहा, ‘हमारा प्रयास रहा है कि हर सदस्य चाहे सीनियर हो या जूनियर, सम्मानित महसूस करे। विचारों को महत्व मिले और अनुभव को मार्गदर्शक बनाया जाए। आने वाले समय में वाटरकूलर की व्यवस्था, संस्था कार्यालय के लिए भूखंड आबंटन और भवन निर्माण हमारी प्राथमिकताएं हैं। यह काम अकेले नहीं, हम सब मिलकर करेंगे।’ दरअसल, उनकी बातों में योजना भी थी और परंपरा के प्रति सम्मान भी दोनों का संतुलन।
टैक्स बार एसोसिएशन के सचिव सीए जिनेंद्र कोचर ने कहा कि सभी सदस्यों के सहयोग से संस्था निरंतर नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह सामूहिक प्रयास का परिणाम है कि आज टैक्स बार एसोसिएशन हनुमानगढ़ को एक सशक्त और सक्रिय संगठन के रूप में देखा जाता है।
कोषाध्यक्ष सीए अंकुश सिंगला ने संस्था की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आर्थिक अनुशासन और पारदर्शिता के कारण भविष्य की योजनाओं को धरातल पर उतारना संभव हो पा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन सीए विनय जिंदल ने किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, गरिमा और आत्मीयता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम में दिवंगत सीनियर सदस्यों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह क्षण पूरे आयोजन का सबसे गंभीर और संवेदनशील पक्ष था, जिसने याद दिलाया कि परंपराएं केवल सम्मान से नहीं, स्मरण से भी जीवित रहती हैं। कुल मिलाकर यह समारोह केवल सम्मान का अवसर नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि जब अनुभव को आदर और परंपरा को स्थान मिलता है, तब संस्थाएं सिर्फ चलती नहीं, वे दिशा देती हैं।
वक्ताओं ने याद दिलाया कि कुछ समय पूर्व संस्था ने सभी सदस्यों को विशेष डायरी भेंट की थी, जिसे सदस्यों ने ‘उपयोगी और अद्वितीय’ बताया। इसके बाद आईडी कार्ड जारी किए गए, जिससे संगठनात्मक पहचान और मजबूत हुई। इन छोटे लेकिन ठोस कदमों ने यह स्पष्ट कर दिया कि संस्था केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहारिक जरूरतों को भी समझती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट संजय अग्रवाल ने कहा, ‘संस्था का इतिहास तो गौरवशाली रहा ही है, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों में जिन कार्यक्रमों को अमली जामा पहनाया गया, उनसे पूरे सदस्य समुदाय में नई ऊर्जा आई है।’ वहीं सीए हर्ष जिंदल ने सफल आयोजन के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से संगठन का सामाजिक और पेशेवर कद दोनों बढ़ता है।
सम्मानित होने वालों में एडवोकेट सज्जन कुमार गोयल, एडवोकेट ओमप्रकाश कड़वा, एडवोकेट राजकुमार बंसल, सीए जगदीशप्रसाद हिसारिया, सीए जगदीशप्रसाद शर्मा, एडवोकेट जगदीश शर्मा, लक्ष्मीनारायण गोयल, एडवोकेट जगदीश कुमार गुप्ता, एडवोकेट सीएम जैन, एडवोकेट भगवानदास जिंदल, एडवोकेट जितेंद्रपाल गर्ग, एडवोकेट बलदेवप्रसाद अग्रवाल, एडवोकेट ओमप्रकाश अग्रवाल, एडवोकेट सुशील कुमार मोदी, एडवोकेट द्वारकाप्रसाद गर्ग और सीए प्रफुल्लकुमार कोचर शामिल रहे।






