



ग्राम सेतु ब्यूरो.
लोक परंपराएँ जब सड़कों पर उतरती हैं, तो केवल उत्सव नहीं बनतीं, वे समाज की स्मृति और संस्कारों को जीवित कर देती हैं। गणगौर ऐसा ही पर्व है, जिसमें आस्था, सौंदर्य और स्त्री-मन की भावनाएँ एक साथ झलकती हैं। हनुमानगढ़ टाउन के गुड मंडी क्षेत्र में स्वामियों के मोहल्ले की गलियाँ आज इसी लोक-आनंद से सराबोर रहीं। ढोल-नगाड़ों की थाप, सुहाग के गीतों की मिठास और रंगोली-पुष्पवर्षा के बीच निकली गणगौर की बिंदोरी ने मानो समय को थाम लिया। गौर माता और ईश्वर जी के प्रतीक रूपों के साथ चली यह बिंदोरी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का जीवंत उत्सव बन गई, जहाँ हर कदम पर परंपरा मुस्कुराती दिखी।
शालनी स्वामी (शालू) बताती हैं कि होली के दूसरे दिन से गणगौर उत्सव की शुरुआत होती है, जो कुल 16 दिनों तक चलता है। इन दिनों में गौर माता और ईश्वर जी की पूजा-अर्चना की जाती है। प्रतिदिन अलग-अलग घरों से गणगौर की बिंदोरी निकाली जाती है, जिसमें महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। गणगौर और ईश्वर को भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है।
गणगौर का उत्सव 21 मार्च को मनाया जा रहा है। आज उत्सव के 14वें दिन गौर माता की विशेष बिंदोरी निकाली गई। यह बिंदोरी अंबेडकर कॉलोनी स्थित सब इंसपेक्टर शंभुदयाल स्वामी के निवास से रवाना होकर गुड मंडी स्थित एडवोकेट कैलाश स्वामी के घर पहुंची। बिंदोरी में सबसे आगे ईश्वर जी और गणगौर माता की सुसज्जित प्रतिमाएं थीं, जिनके साथ महिलाएं मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। मार्ग में रंगोली सजाई गई और जगह-जगह पुष्प वर्षा कर बिंदोरी का स्वागत किया गया।
एसआई शंभुदयाल स्वामी की धर्मपत्नी सुमित्रा स्वामी, पुत्रवधू शालिनी और दीपिका स्वामी द्वारा बनोरा लेकर बिंदोरी का नेतृत्व किया गया। कैलाश स्वामी के निवास पर पहुंचने के बाद महिलाओं ने विधिवत गणगौर व ईश्वर की पूजा की और प्रसाद अर्पित किया। इस दौरान नवविवाहित महिलाओं सहित मोहल्ले और परिवार की सभी महिलाओं ने एक साथ एकत्रित होकर ढोल-नगाड़ों की धुन पर नृत्य किया। कार्यक्रम में प्रियंका स्वामी, कोमल स्वामी, रेखा स्वामी, सरिता स्वामी, अन्नपूर्णा स्वामी, मंजू सरावगी, ऋतु सरावगी, सुमित्रा स्वामी, पंकज स्वामी, संतोष स्वामी, साक्षी टक्कर, नेहा टक्कर, चंद्रकांता स्वामी, प्रीति स्वामी, निर्मला भार्गव, दयावती स्वामी, सरबती, लीलावती वर्मा, चमेली देवी, तारा देवी वर्मा, मोनिका स्वामी और दीपिका स्वामी सहित अनेक महिलाओं ने भाग लेकर गणगौर माता का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। पूरे आयोजन ने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की।



